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चैत्र माह की नवरातों का आज दूसरा दिन है। ये दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा और आराधना का दिन होता है। इस दिन सफेद पुष्पों और नौवेद्यो के साथ माता की वन्दना का विधान होता है। चूँकि माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तपस्विनी की तरह है, यानी कि माँ ब्रह्मचारिणी तप की प्रतीक हैं। इसलिए चैत के नवरात में उसके दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा और अर्चना करने से मनुष्यों को विशेष कृपा मिलती है और इसके अलावा जीवन की अनेक समस्याओं और परेशानियों का नाश होता है। माँ देवी दुर्गा का यह रूप वास्तव में भक्तों व उसके सिद्ध हस्तों को अचूक फल देने वाला होता है। इसलिए आइए आपको बताते हैं कि इस दिन माँ ब्रह्मचारिणी का पूजन आपको किस विदि से करना चाहिए।
इसके लिए आपको सर्वप्रथम इस बात का ध्यान रखना है कि आपने जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमत्रित किया है, उनकी फूल, अक्षत, रोली व चंदन से पूजा करें। इसके लिए सबसे पहले उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें। इसके बाद देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं, उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रहों, दशदिक्पालों, नगर देवता और ग्राम देवी-देवताओं की पूजा करें। इन सबकी पूजा के पश्चात ही माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करें।
आपको बता दें कि इस प्रकार से माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से वह बहुत प्रसन्न होती हैं। चूँकि माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय है। इसलिए इस दिन उनकी आराधना और उनका ध्यान लगाने से मनुष्यों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश ज्योतिर्मय होता है और नये मार्ग प्रशस्त होते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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