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ग्रामीण जीवन कितना आनंदमय होता है इसका अनुमान वही इंसान लगा सकता है जो कि गांव में निवास करता है। गांव में निवास करने वाले लोग अपने आप में ही इतने खुश होते हैं कि उन्हें शहर के माहौल या शहरी चकाचौंध की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
गांव के लोग अपनी छोटी-छोटी खुशियों में सभी को शामिल करते हैं। सभी के साथ इस तरीके से मिलजुल कर रहते हैं यदि आवश्यकता हो तो एक दूसरे की मदद कर सके। गांव के छोटे-छोटे खपड़े वाले घर जिनमें गाय के गोबर से पुताई की जाती है घर के बाहर रंग बिरंगी चित्र लेख या फूल पत्तियां बनाकर घरों की दीवार को सजाया जाता है।
ठंड के दिनों में शाम होते ही घर के बाहर लकड़ियों का ढेर लगा लिया जाता है और आग लगाकर एक साथ बैठकर खूब बातें की जाती है एक दूसरे का हालचाल पूछा जाता है। गर्मियों के दिनों में घर के बाहर पेड़ के नीचे सोया जाता है जो बहुत ही आनंदमय होता है।
गांव के बाहर चौगान का लगना जहां पर बैठकर सभी अपने अपने घर की समस्याओं को सुलझाते है। फसलों की कटाई या बुवाई के समय सभी किसान एक साथ अपने -अपने खेतों पर किसी एक धुन को गुनगुनाते हुए फसलों की कटाई करते है जरूरत होने पर एक दूसरे की मदद भी करते है।
चूल्हे में खाना बनता है जो कि बहुत ही स्वादिष्ट होता है तथा स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक माना जाता है। अपने खेतों पर उगाई हरी -हरी सब्जियां जो कि बिना किसी रासायनिक खाद के उगाई जाती हैं वह भी बहुत ही स्वादिष्ट और लाभदायक होती है।
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