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हमारा बचपन अपनी माँ के आँचल और पिता के साये में सबसे ज़्यादा ख़ूबसूरत होता है। ये हमें दुनिया का सबसे हसीन और सुकून देने वाला पल होता है जब हम अपने माँ-बाप के सीने से लगे हुए होते हैं। वास्तव में माँ-बाप से मिलने वाले इस अद्भुत स्नेह और ममता की स्मृतियाँ मरते दम तक हममे समायी हुयी रहती है। ऐसे में आप समझ सकते हैं, कि कोई वैसा बचपन कैसा होता होगा, जिसमें एक पल के लिए उसके पिता अतवा माँ की उससे दूरियाँ पैदा हो। लच्चाई यह है कि ऐसा बचपन हरेक दिन सिर्फ़ यही राह तकता है कि कब उसके जीवन के इन अनमोल सुकून को देने वाले उसके माँ-बाप उसके सामने खड़े होंगे और आकर उसे अपने सीने से लगा लेंगे।
समझने वाली बात यह है कि सिविलियन्स को तो ऐसा कोई भी दिन नहीं देखना पड़ता है, जबकि उनके माँ-बाप सुबह से लेकर शाम तक में कबी न कबी उनके साथ ज़रूर होते हैं। ग़ौरतलब है कि बहुत संभव हो सकता है कि दफ़्तर की जल्दबाज़ी या दिनभर की भागदौड़ इन्हें अपने बच्चों से मिलने का समय न दे पाता हो, लेकिन रात का भोजन तो सिविलियन्स फेमिलीज़ में एक साथ ही होता है। दिक्कत तो सच में फौजी परिवार के बच्चों को होती है।
जी हाँ, आपको बता दें कि अपने सोल्जर पैरेंट्स से दूर रहने वाले बच्चे हर रोज़ इससे दो-चार होते रहते हैं और इसी प्रक्रिया में सिपाही माँ-बात की औलादों का कलेजा सबसे ज़्यादा मज़बूत होता जाता है। लेकिन जब उनके पैरेंट्स अचानक से उनके सामने आ पड़ते हैं और आकर अपने बच्चों को सरप्राइज़ करते हैं, तो नज़ारा बेहद भावुक, स्थिर और रोमांचित कर देने वाले होता है।
यहाँ देखें ऐसा ही एक VIDEO:
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Author: Amit Rajpoot
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