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अधिक सोयाबीन का सेवन मनुष्यों के लिए बेहद हानिकारक होता है। जी हाँ, ये बात आपको सुनने में थोड़ा अटपटी ज़रूर लग सकती है, लेकिन ये बात सौ फीसदी सच है कि सोयाबीन का अधिक सेवन हमारे स्वास्थ्य की दृष्टि नुकसानदेह होता है। लेकिन ज़्यादातर लोगों को इस बात का भ्रम होता है कि सोयाबीन का भरपूर सेवन करने से हमें प्रोटीन के साथ-साथ और भी कई तरह के फायदे मिलते हैं। इनमें से ही एक अभिमत है कि प्रोटीन खाने से डायबिटीज़ ठीक होता है। हालाँकि ये सच है और ऐसा सिद्ध भी है कि सोयाबीन में प्रोटीन की मात्रा बेहद जटिल होती है।
आपको बता दें कि दुनियाभर में अभी ऐसा कोई अध्ययन नहीं हुआ है, जिससे यह सिद्ध हो पाया हो कि सोयाबीन से डायबिटीज़ ठीक होता है। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों ने इसकी कल्पना ज़रूर की है, कि सोयाबीन के सेवन से डायबिटीज़ ठीक होता है, लेकिन दुनिया कहीं भी इसके बारे में कुछ भी न तो सिद्ध हुआ है और न ही इससे संबंधित कोई दवा ही अभी मार्केट में उपलब्ध है।
ग़ौरतलब है कि सोयाबीन द्वारा जो प्रोटीन मिलता है, वो बेहद जटिल होता है। जटिल प्रोटीन जल्दी से शरीर में पचता नहीं है। मसलन जैसा कि हम दालों का सेवन करते हैं, तो उससे प्राप्त प्रोटीन जितनी जल्दी पच जाता है, वह प्रोटीन के सेवन से नहीं। सोयाबीन से निकला प्रोटीन हमारे शरीर में भण्डार बन जाता है, जिसका उपयोग हमारा शरीर नहीं कर पाता है। इसीलिए दुनियाभर में कहीं भी सोयाबीन खाने की बात नहीं कही गयी है।
आपको बता दें कि अमेरिका और यूरोप में सोयाबीन का सेवन कहीं नहीं किया जाता है। यूरोप में इसे सिर्फ़ जानवरों को ही ख़ासतौर पर सुअरों को खिलाया जाता है। इसमें भी सोयाबीन की खली को कभी भी गाय को नहीं खिलाया जाता है। यूरोप में सोयाबीन प्रमुख रूप से नीदरलैण्ड में ही जानवरों को खिलाया जाता है।
Author: Amit Rajpoot
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