Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
Buddha आज के मानव जीवन में एक विचार है, जिससे करोड़ों करोड़ लोग प्रभावित होते हैं और इससे सीख पाकर अपने जीवन को बदलने का प्रयास करते हैं। इन्हीं सीखों में से एक सीख यह है कि कर्म को लेकर लोगों को जागरुक होना चाहिए। इसके लिए आज महात्मा बुद्ध के प्रवचन की जो कथा हम बताने जा रहे हैं, वह आपके दिव्य चक्षुओं को खोल देगी। जी हाँ, दरअसल एक व्यक्ति बुद्ध का प्रवचन सुनने उनके आश्रम आया करता था। वह बड़े ही तन्मयता के साथ बुद्ध का प्रवचन सुना करता था। आपको बता दें कि महात्मा बुद्ध अपने प्रवचनों में लोभ, मोह, द्वेष और अहंकार त्यागकर जीवन में परम् लक्ष्य की प्राप्ति के उपदेश दिया करता था।
एक बार वह व्यक्ति असंतुष्ट मन से बुद्ध के पास आकर बोला कि मुझे क्षमा करें बुद्ध। मैं लगभग एक माह से आपका प्रवचन सुनने आता हूँ, लेकिन इसका मेरे जीवन में कोई भी प्रभाव नहीं पड़ रहा है। मेरा जीवन जैसा पहले चल रहा था। ठीक वैसे अब भी चल रहा है, मेरे जीवन में तो आपका कोई प्रभाव ही नहीं है। मैंने सोचा कि मैं आपका प्रवचन सुन लूँगा तो मेरा जीवन बदल जायेगा।
बुद्ध मुस्कुराये और बोले- तुम ये बताओ कि तुम रहने वाले कहाँ के हो। उत्तर मिला श्रावस्ती से। बुद्ध ने फिर पूछा कि तुम्हें श्रावस्ती से यहाँ तक आने में कितना समय लग जाता है। वह व्यक्ति बोला- पैदल आने पर एक दिन, बैलगाड़ी से आधा दिन और घोड़े की सवारी करके आने पर आधे दिन से भी कम समय लगता है।
बुद्ध ने उस व्यक्ति से कहा कि अब तुम इन सभी संसाधनों के बग़ैर श्रावस्ती वापस चले जाओ। बताओ, तुम्हें कितना समय लगेगा। वह व्यक्ति बोला- यह जो संभव ही नहीं है, मुझे तो कोई संसाधन चाहिए ही। बुद्ध बोले- अब बताओ, मैं जो सत्संग देता था वह संसाधन ही है, लेकिन बिना कर्म किये अर्थात् उसे अमल में लाये बग़ैर तुम कैसे अपने लक्ष्य तक पहुँच सकते हो। उस व्यक्ति की आँखें ख़ुल गयीं और वह कर्म के महत्व को समझ गया, कि जीवन में बिना कर्म के कुछ भी संभव नहीं है।
Author: Amit Rajpoot
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.