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उषापान यानी की सुबह का पानी पीना कितना ज़रूरी है और कितना नहीं ये सबको भ्रमित करके रख देता है। जी हाँ, कई बार बीच-बीच में विदेशों की कुछ रिसर्च आकर इसमें कंफ़्यूज़न क्रिएट कर देती हैं। कोई कहता है कि सुबह प्यास हो या फिर न हो, लेकिन सुबह पानी ज़रूरी पीना चाहिए। कबी-कबी ऐसी भी रिसर्च आती हैं कि सुबह प्यास लगी हो या न लगी हो लेकिन चार गिलास पानी पीना चाहिए। वास्तव में ये सब इंसान के दिमाग़ में भ्रम पैदा करते हैं। जी हाँ, इसलिए सबसे बेहतर सवाल ये होना चाहिए कि सुबह का पानी किसे पीना चाहिए और किसे नहीं। इसका अलावा यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि हमें कितनी मात्रा में पानी पीना चाहिए।
आपको बता दें कि निघण्टरत्नाकर नाम की इस पुस्तक में उषापान के बारे में बड़ा ही स्पष्ट ढंग से लिखा हुआ है। निघण्टरत्नाकर में उषापान का वर्णन रसायन अध्याय में मिलता है न कि दिनचर्या अध्याय में। निघण्टरत्नाकर के रसायन अध्याय के हिसाब से देखें तो सुबह का पानी हमारे लिए टॉनिक की तरह होता है। जी हाँ, ऐसा भी लिखा है कि सुबह उठकर पानी पीना वाले लोगों के शरीर से सभी तरह के रोग दूर होते हैं और वह सौ वर्ष तक जीता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि जो व्यक्ति स्नेह-पान किया हुआ है यानी की तेल और घी आदि का अधिक सेवन किया हुआ है उसे और जिस व्यक्ति के सीने में किसी तरह की चोट लगी हुयी हो उसे उषापान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों के पेट में कड़कपन हो या फिर हिचकियों से पीड़ित व्यक्तियों को सुबह उठकर पानी नहीं पीना चाहिए। इसके साथ निघण्टरत्नाकर में यह भी बताया गया है कि हर व्यक्ति को औसतन 750 मिली. पानी पीना चाहिए।
Author: Amit Rajpoot
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