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बेहद सुखद है ये जानना कि आज जहाँ दुनियाभर में लोगों में एकाकीपन बढ़ता चला जा रहा है और लोग एक-दूसरे के साथ मतलब कम कर रहे हैं या फिर ख़त्म कर रहे हैं, वहीं एक तस्वीर ऐसी भी देखने को मिलती है, जिसमें सीमा वाघमोड़े जैसे लोगों के वृत्तचित्र अंकित होते हैं। जी हाँ, आपको बता दें कि सीमा वाघमोड़े एक ऐसी महिला हैं, जिनका बचपन से ही सामाजिक सरोकारों की ओर मन रमता रहा है और इन्हें काम करना भी बहुत अच्छा लगता था। यही कारण था कि सीमा वाघमोड़े ने अपने जीवन के शुरुआती कुछ सालों में कुष्ठ रोगियों की सेवा और उनके पुनर्वास के लिए जमकर काम किया। इसके बाद शादीशुदा सीमा वाघमोड़े के पति का ट्रांसफर पुणे में हो गया और उनके ये सारे काम अचानक रुक गये।
लेकिन फिर एक नई उपेक्षा ने सीमा वाघमोड़े को एक नया काम करने की प्रतिबद्धता से भर दिया और ये उपेक्षा था यौनकर्म में खपी रहने वाली स्त्रियों और लड़कियों की। हुआ यूँ कि पुणे के बुधवार पेठ इलाक़े में सीमा वाघमोड़े ने एक ऐसा दृश्य देखा जिसमें एक भूखा बच्चा वेश्यावृत्ति में लिप्त अपनी माँ से जल्दी ही एक ग्राहक पकड़ लेने की बात कहता है, जिससे कि उसकी भूख मिट सके। इस माजरे को देखकर सीमा वाघमोड़े का सिर सकराकर घूम गया और इससे वह इतनी स्तब्ध हुयीं कि अपना आगे का जीवन वेश्यावृत्ति में फँसी इन्ही महिलाओं को इस दलदल से बाहर निकालने की ठान ली।
इसके बाद से सीमा वाघमोड़े ने इस दिशा में काफी काम किया और इसी क्रम में चलकर इन्होंने ‘कायाकल्प’ नाम का अपना एक एनजीओ बनाया, जिसका लक्ष्य यौकर्मियों को नए पेशे से जोड़ना और उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाना है। तीन साल पहले सीमा वाघमोड़े ने पुणे से 120 किमी. दूर बोरी गाँव में एक पुनर्वास केन्द्र की स्थापना भी कर दी है, जिसमें यौन कर्मियों के बच्चों को रका गया है। मालूम हो कि सीमा वाघमोड़े ने अप तक 10,000 से ज़्यादा यौनकर्मियों का पुनर्वास कर दिया है।
Author: Amit Rajpoot
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