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लोकतंत्र का महापर्व शुरू होने के साथ ही देश मे राजनीतिक सरगर्मी भी काफी तेज हो चली है, यहां तक कि इस बार फिल्म इंडस्ट्री में भी 17वीं लोक सभा चुनाव को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। बी-टाउन का एक ग्रुप जहां जनता से इस चुनाव में मोदी सरकार को वोट न देने की अपील कर रहा है, वहीं फिल्मी कलाकारों दूसरे समूह ने ‘मजबूत सरकार’ की अपील के साथ बीजेपी को वोट करने की गुहार लगाई है। इसके अलावा कई बॉलीवुड सेलेब्स अपनी पसंदीदा पार्टी के लिए जमकर प्रचार कर रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि एक चुनावी समर ऐसा भी था जब खुद बॉलीवुड ने अपनी पार्टी मैदान में उतारी थी। जी हां, एक समय में फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने मिलकर खुद की राजनीतिक पार्टी बनाई थी जिसके अध्यक्ष बने थें देवानंद ।
दरअसल, ये बात साल 1975 के इमरजेंसी के दौर की है, जब कांग्रेस सरकार की सख्ती से पूरा देश हिल गया था। ऐसे में जब आपातकाल के बाद 1977 में चुनाव आए तो फिल्मी सितारों ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने के लिए जनता पार्टी को सपोर्ट किया। पर जनता पार्टी की सरकार बनने पर जब फिल्म बिरादरी की अपेक्षित मांगे पूरी नहीं हुई तो इंडस्ट्री के लोग काफी हताशा हुए । जिसके चलते साल 1979 में जनता सरकार के पतन के बाद बॉलीवुड ने अपने खुद का एक राजनीतिक दल का गठन करने का फैसला किया।
फिल्म इंडस्ट्री की तरफ से इस राजनीतिक मुहिम की अगुआई देवानंद ने की, जिसमें उनका साथ दिया विजय आनंद ने। इसके इलावा मशहूर फिल्मकार वी.शांताराम, जीपी सिप्पी, श्री राम बोहरा, आईएस जोहर, रामानंद सागर, आत्माराम के साथ ही शत्रुघन सिन्हा, धर्मेंद्र, हेमामालिनी, संजीव कुमार जैसे नामी सितारे भी इससे जुड़ गए। सभी ने एकमत से देवानंद साहब को अपनी राजनीतिक पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया।
इस तरह से कांग्रेस और जनता पार्टी से हताश हुए फिल्म इंडस्ट्री ने ‘थर्ड आल्टर्नेटिव’ के तौर पर खुद की पार्टी की नींव रखी, जिसकी घोषणा चार सितंबर 1979 को मुंबई के ताजमहल होटल में एक प्रेस कांफ्रेंस में ‘नेशनल पार्टी’ के रूप में की गई। साथ ही इस मौके पर पार्टी का घोषणापत्र भी जारी किया गया, जो कि काफी मुखर और प्रभावी था।
नेशनल पार्टी के घोषणा पत्र में कहा गया कि, "इंदिरा की तानाशाही से त्रस्त लोगों ने जनता पार्टी को चुना, लेकिन निराशा ही हाथ लगी और अब यह दल भी टूट चुका है... ऐसे में अब ज़रूरत है एक स्थायी सरकार दे सकने वाली पार्टी की... नेशनल पार्टी के गठन के पीछे का उद्देश्य भी देश के लोगों को थर्ड आल्टर्नेटिव देने का है... नेशनल पार्टी वह मंच है, जहां समाज के अलग-अलग हल्कों में काम करते हुए समान विचार वाले तमाम लोग एक साथ आ सकते हैं,जिनमें लेखक और विचारक से लेकर व्यापारी, मज़दूर, किसान, महिलाएं सभी नौजवान शामिल हैं।"
फिल्मी सितारों की इस पार्टी का मुख्यालय वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में बनाया गया। वैसे आमतौर पर इसका सक्रिय संचालन देवानंद के दफ्तर से ही होता था। वैसे 'फिल्म वालों की पार्टी में सबका स्वागत है' वाली बात ने उस दौर में देश के नौजवानों को काफी आकर्षित किया और लोग इस फिल्मी पार्टी में अपनी रूचि दिखाने लगें। जिससे जनता पार्टी और कांग्रेस को चिंता में डाल दिया।
उस समय में मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित नेशनल पार्टी की रैली में उमड़ी भीड़ ने इस चिंता को और बढ़ा दिया था। वहीं इस मौके पर प्रसिद्ध अभिनेता आइएस जोहर की इस घोषणा ने कि वो जनता सरकार में स्वास्थ्य मंत्री राज नारायण के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे इस आग में घी डालने का काम किया। जोहर के इस इस बयान से चिढ़कर राज नारायण ने भी धमकी दे डाली कि अगर जोहर ऐसी बयानबाजी से बाज नहीं आये तो मैं उनके हाथ-पैर तोड़ दूंगा।
इस तरह नेशनल पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता ही उसके अस्तित्व की दुश्मन बन गई । जनता सरकार और कांग्रेस के बड़े नेताओं की तरफ रामानंद सागर, जीपी सिप्पी जैसे मशहूर फिल्मकारों को नसीहत दी गई कि अगर फिल्म इंडस्ट्री को बचाना है तो वे इस ‘तमाशे’ को बंद कर दें। ऐसे में सियासती ताकतों से मिल रही इस धमकियों के चलते नेशनल पार्टी से कई कलाकार किनारा करने लगे । आखिर में देवानंद लगभग अकेले ही रह गए। इसलिए उन्होंने भी नेशनल पार्टी के विचार को खत्म करने में अपनी भलाई समझी। इस तरह से फिल्मी कलाकारों के ये राजनीतिक मुहीम और उनकी बनाई गई ये पार्टी शुरू होते ही खत्म हो गई।
Author: Yashodhara virodai
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