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गुवा का अर्थ सुपारी और हॉट का बाजार। इस प्रकार गुवाहाटी का अर्थ हुआ सुपारी बाजार। यहां सुपारी बाजार केंद्र तो है ही परंतु गुवाहाटी एक अन्य कारण से पूरे भारत में बहुत प्रसिद्ध है और वह कारण हैं यहां पर स्थित कामाख्या देवी शक्तिपीठ।
गुवाहाटी को कामरूप भी कहा जाता है। मान्यता अनुसार कामदेव ने यहीं पर महादेव की तपस्या भंग की थी। और पुनः महादेव ने अपने नेत्रों की अग्नि से कामदेव को भस्म कर दिया था। इस कारण से गुवाहाटी का नाम भस्मास्थल भी है।
कामदेव की पत्नी रती मे महादेव की आराधना करके उन्हें प्रसन्न किया और अपने पति को पुनर्जीवित कर नवीन रूप प्रदान करने की विनती की। महादेव ने उसकी विनती स्वीकार करके कामदेव को जीवित कर उसे रूप प्रदान किया। चूंकि कामदेव ने इस स्थल पर अपना रूप प्राप्त किया अतः इसे काम रूप कहते हैं।
पौराणिक मान्यता अनुसार सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपने पति शिव की निंदा स्वयं दक्ष द्वारा सुनकर दुखी हो यज्ञ की अग्नि कुंड में कूद पड़ी। शिव जी ने क्रोध होकर यज्ञ का नाश करवा दिया और यज्ञ स्थल से सती के शरीर को अपने कंधे पर रख मोहवश समस्त भूमंडल में घूमने लगे।
इसी बीच पृथ्वी पर दैत्य तारकासुर का आतंक बढ़ने लगा। और तब विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। अलग-अलग टुकड़े भारत के 51 भिन्न-भिन्न स्थलों पर गिरे। कामरूप में सती की योनि गिरी थी इस कारण भी आसाम क्षेत्र को कामरूप कामाख्या कहते हैं।
इस मंदिर की देवी कामाख्या को काली देवी का रूप माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि तंत्र मंत्र जादू टोना की सिद्धि यहां बहुत आसानी से हो जाती है। क्योंकि सती की योनि मुद्रा यहां पर गिरी थी। अतः इस क्षेत्र में काम की बहुत प्रबलता है।
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