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सभी जानते हैं कि हमारे भारत में भगवान की पूजा और व्रत-विधि का बहुत महत्व होता है हर कोई भगवान की पूजा करता हैं। हिन्दू धर्म में साल में लगभग 12 सक्रांतियां मनाई जाती है, जिनमें सभी का अपना-अपना महत्व होता है। लेकिन बता दें कि इन सभी सक्रांतियों में एक है मेष सक्रांति, जिसमें सूर्य मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इसी वजह इस संक्रांति का नाम मेष संक्रांति पड़ता है। मेष राशि में सूर्य का परिवर्तन 15 अप्रैल यानि कि आज होगी। जानते हैं इस संक्रांति का क्या महत्व है।
इस साल यह संक्रांति इस राशि के जातकों के लिए ढ़ेरों खुशियां और सफलताएं लेकर आएगा। साथ ही परिक्षाओं में भी आपको सफलताएं प्राप्त होंगी। इन दिनों तीर्थदर्शन का भी बहुत महत्व होता है। साथ ही सूर्यदेव की पूजा और आराधना का भी बहुत महत्व है।
इस संक्रांति पर देश के कई राज्यों में धूम मची रहती है। मान्‍यता है इस दिन भगवान सूर्य के अलावा शक्ति स्‍वरूपा मां काली, भगवान शिव और भगवान विष्‍णु की आराधना करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है।
वैसे तो हर जग मेष संक्रांति धूम-धाम से मनाई जाती है लेकिन उत्तराखंड में इसकी धूम देखने को मिलती है। बता दें यहां पर एक पत्‍थर को दैत्‍य का प्रतीक मानकर डंडो से उसकी पिटाई करते हैं और इसके बाद भगवान की पूजा कर सुख-समृद्धि का प्रार्थना करते हैं। पारंपरिक गीत और नृत्य किए जाते हैं।
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