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भारतीय काल गणना और ग्रहों से प्रभावों व दुष्प्रभावों के अनुसार तिथि विशेष को कुछ विशेष चीज़ों का सेवन करना भारतीय आहार पद्यति के हिसाब से श्रेष्ठ और शुभ फल देने वाला बताया गया है। इस प्रकार भारतीय आहार पद्यति में क्या खाएँ और कैसे खाएँ इस पर एक दृष्टान्त प्रस्तुत किया गया है। जी हाँ, आपको बता दें कि भविष्य पुराण में सुमन्तु मुनि कहते हैं कि आत्मा की शुद्धि और मुक्ति के लिए मनुष्य को प्रतिपदा तिथि यानी कि हिन्दू पंचाग के अनुसार पड़ने वाली पहली तिथि को गाय का दूध पीना चाहिए। ग़ौरतलब है कि जिस प्रकार हमारी एक दिन की डाइट में खाने की चीज़ों का निर्धारण रहता है, ठीक वैसे ही भोजन से मिलने वाले ताप और उसके गुणों का पाक्षिक यानी कि 15 दिनों का चार्ट चैयार किया जाना चाहिए।
वास्तव में भोजन का यह चार्ट सूर्य को फॉलो करना चाहिए। इसलिए आंग्ल कैलेंडर के हिसाब से इसका फॉलो-अप लेना वैज्ञानिक नहीं होगा। ऐस में शास्त्र सम्मत और हिन्दू कैलेण्ड के हिसाब से ही भोजन का मिर्धारण करना ज़्यादा बेहतर है। इसके अनुसार द्वितीया तिथि को सिर्फ मीठा भोजन करना चाहिए, जैसे कि आप गुण का मीठा भात बना सकते हैं अत्वा खीर, हलवा या पिर कुछ भी जो आपके मन को अच्छा लगे वह आप द्वितीया तिति को बनाकर खा सकते हैं।
इसी प्रकार तृतीया तिथि को तिल से बना खाना खाएं। चौथी तिथि को आपको पुनः दूध पीना चाहिए। पंचमी के दिन केवल फल खाकर रहें। षष्ठी तिथि को यानी कि छठे दिन केवल शाक खाएं। सातवीं तिथि को बेल और आठवीं तिथि को पिसा हुआ भोजन करने का प्रावधान भविष्य पुराण में उल्लिखित है।
नवमी तिथि को आग में पकाया हुआ भोजन, दशमी और एकादशी को घी युक्त भोजन करें। द्वादशी के दिन खीर, त्रयोदशी के दिन गोमूत्र या दूध पीना चाहिए। चैदहवें दिन यानी कि चतुर्दसी के दिन आपको जौ अथवा गेहूं का सेवन कर लेना चाहिए। इसके बाद 15वें दिन कुशा से पवित्र जल पीना आपके लिए शुभ होगा और अत्यत्न लाभकारी भी।
Author: Amit Rajpoot
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