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कमलेश प्रांजल भाषा के हिन्दी कवि हैं। गणित की तीक्ष्ण पहेलियों के साथ-साथ समाज की अनेक पहेलियों को सुलझाने में कमलेश को महारत हासिल है। उत्तर प्रदेश के फ़तेहपुर जनपद की खागा तहसील के गाँव बरकत में जन्में पेशे से अध्यापक कमलेश की लेखनी लोकभाषा से बात को विशेष ढंग से कहती है। बेहद सरल, सहज और स्पष्ट रूप से अपनी बात को कविताओं और दोहों के माध्यम से कह देने में माहिर कमलेश जितना अपने अध्यापन के दौरान गणित के सूत्रों के साथ बातें करते हैं, उतना ही छायावाद की लताओं से भी वो मुख़ातिब होते हैं। शायद तभी वो जब अपने दोहों में स्वास्थ्य की बातें करते हैं, तो शारीरिक स्वास्थ्य से पहले मानसिक स्वास्थ्य की बातें करते हैं। इन्हीं कारणों से कमलेश के दोहे अपना अलग मकाम रखते हैं और पाठकों द्वारा सराहे जाते हैं। कमलेश कहते हैं कि “मेरे स्वास्थ्य वर्धक दोहों का शारिरिक रोगी जल से तथा मानसिक रोगी हवा से सेवन करें।” तो फिर देर किस बात की। आइए, आपको कमलेश के 12 स्वास्थ्य वर्धक दोहों से मुख़ाबित कराते हैं।
1.
पात पपीता पीस के,
बकरी दूध मिलाय।
कैंसर-डेंगू-मलेरिया,
बिल्कुल से मिट जाये।।
2.
पनघट पर बरगद खड़ा,
लिख डाला इतिहास।
किस ने किस से किस तरह,
यहाँ बुझाई प्यास।।
3.
बरकतपुर के ताल में,
मझिलगाँव के पास।
रुद्रवंति बूटी करै,
धात-वात-पित नाश।।
4.
धन की धधकन में जले,
मानवता के नात।
रोटी बेटी कर रहे,
गीदड़ केरि जमात।।
5.
पी पल-पल लखि डोलती,
जैसे पीपल पात।
फिसलन पी में क्यों हुयी,
बिन बादल बरसात।।
6.
जिसकी ख़ुशबू से तेरा,
सुरभित सारा गात।
वही घिनौने लग रहें
हैं तुझको पितु-मात।।
7.
औरन के दुःख देख के,
जिनका मन खिल जाये।
परसंतापी लोग हैं,
इनका ना पतियाय।।
8.
पनघट पूछे कूप से,
कौन हमारा मीत।
स्वारथ के संसार में,
सबकी ओछी प्रीत।।
9.
जल जल कर जल में खिले,
जलजातों के फूल।
ऊपर ऊपर दीखते,
जैसे ग़ायब मूल।।
10.
तोड़ दये अनुबंध सब,
नदियों के दो तीर।
ज्वार, जवानी, जस्न में,
समझ न आवै पीर।।
11.
धरम करम सब व्यर्थ हैं,
जो मन मैला होय।
तन-मन-धन अरु वचन से,
करम करै जो कोय।।
12.
सोंधी माटी गाँव की,
करै दवा का काम।
रामू काका मस्त हैं,
सुबह-दुपहरी-शाम।।
Author: Amit Rajpoot
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