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जी हां, अब तक आपको इंटरनेट यूज करने के लिए जहां स्मार्टफोन,कंप्यूटर का प्रयोग करना होता है, पर आने वाले समय में ऐसा भी हो सकता है कि सीधे आपके दिमाग से ही इंटरनेट संचालित हो जाए। ऐसा हम यूं ही नहीं कह रहे हैं बल्कि ये दावा है उन वैज्ञानिको का, जो कि नैनो टेक्नॉलिजी पर काम कर रहे हैं। यानी कि भविष्य में हमारे पास ऐसी तकनीकि हो सकती है, जिससे सिर्फ सोचने मात्र से हम इंटरनेट पर मौजूद उन जानकारी तक आसानी से पहुंच सकेंगे जो हमे चाहिए होगी। ये बिल्कुल हॉलीवुड फिल्म मैट्रिक्स की तरह होगा।
दरअसल, फ्रंटियर्स इन न्यूरोसाइंस में प्रकाशित एक हालिया शोध के अनुसार नैनो टेक्नॉलिजी, नैनो मेडिसिन, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस जैसे तकनीकी के चलते इस सदी में मानव मस्तिष्क/क्लाउट इंटरफेस (बी/ सीआइ) का विकास हो जाएगा। असल में, भविष्यवादी लेखक और शोधकर्ता रे कुर्जवील ने सबसे पहले बी/ सीआइ का कांसेप्ट दिया था। उनका कहना था कि न्यूरल नैनोरोबोट को मनुष्य के मस्तिष्क के नियोकार्टेक्स के साथ जोड़ दिया जाए तो दिमाग का सम्पर्क सीधे क्लाउड नेटवर्क से हो सकता है।
वहीं अब अमेरिका के कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट फॉर मॉलीकुलर मैनुफैक्र्चंरग के शोधकर्ताओं ने अपने अध्यन में ये पाया है कि नियोकॉर्टेक्स हमारे दिमाग का सबसे सचेत हिस्सा है, ऐसे में न्यूरल नैनोरोबोट के जरिए मस्तिष्क कोशिकाओं को नियंत्रित कर उनको मॉनीटर कर सकते हैं। जिसके बाद ये भी सिग्नल प्रसारित करेगा और फिर क्लाउड नेटवर्क से सम्पर्क साध कर ये अपने मतलब की सारी जानकारी हमारे सामने रख देगा।
वहीं शोधकर्ताओं का कहना है कि बी/सीआइ तकनीक के जरीए भविष्य में ‘ग्लोबल सुपरब्रेन’ भी बनाया जा सकता है। यानी कि मनुष्य के दिमाग और एआइ के नेटवर्क से सामूहिक विचारों का भी पता चल सकेगा।
Author: Yashodhara Virodai
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