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सारी बीमारी एक तरफ और आयुर्वेद की ये दवा एक तरफ। जी हाँ, गर्मी के मौसम में आपको किसी भी तरह की कोई भी समस्या हो, इस दवा से बढ़िया हल आपके लिए कोई दूसरा हो नहीं सकता है। यक़ीन मानिए, गर्मियों के मौसम में यदि आपको कोई भी समस्या हो तो आज हम आपको एक ऐसी चीज़ के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके नाम में ही गर्मी ख़त्म करने का शब्द छिपा है। तो चलिए आपको उस चीज़ के बारे में बताते हैं और उसका नाम है कुष्माण्ड। कुष्माण्ड शब्द में ही कु के साथ ऊष्म ये दर्शाता है कि ये फल ऊष्मा का कुचालक है।
आपको बता दें कि कुष्माण्ड को हम कुमढा, कोहड़ा, पेठा, व्हाइट पंपकिन और कोहड़ा के नाम से भी जानते हैं। ये पाने में बहुत ही सहज होता है और देश के कई हिस्सों में इसकी उपलब्धता आसानी से हो जाती है। ये गर्मी के लिए एक कमाल की और विशेष दवा है। आयुर्वेद के हिसाब से देखें तो कुमढ़ा तीन मर्मों में काम आता है।
आयुर्वेद की माने तो कुष्माण्ड लघु, स्निग्ध, मधुर, ठण्डा रसपूर्ण और हल्का होता है। इसलिए इसका सबसे बेहतर असर व्यक्ति के दिमाग़ में होता है। यानी कि जो व्यक्ति गर्मी के दिनों में अधिक चिड़चिड़े और ग़ुस्साल होते हैं, उन्हें गर्मी में कुष्माण्ड का सेवन ज़रूर करना चाहिए।
ग़ौरतलब है कि कुष्माण्ड को भोजन के तौर पर सब्ज़ी के रूप में खाना चाहिए। इसके अंदर कुछ विशेष तरह के तत्व पाये जाते हैं, जो कई तरह के पेट दर्द को ठीक करता है। इसके अलावा कुमढा रक्त व पित्त का नाश करने के साथ-साथ हृदय संबंधी समस्याओं के लिए रामबाण माना जाता है। पेठा खाने से इंसान का दिल मज़बूत हो जाता है।
Author: Amit Rajpoot
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