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हिंदी सिनेमा में ऐसी कई सारी अभिनेत्रियां रही हैं, जिन्होने पर्दे पर अपने खूबसूरती के जलवे बिखेरे, लेकिन पर्दे पर खूबसूरती और सादगी का मेल बहुत कम देखा गया है। पर ऐसे ही अजब संयोग की मिसाल पेश की थी 70 के दशक में एक अभिनेत्री ने... जी हां, हम बात कर रहे हैं अभिनेत्री मौसमी चटर्जी की, जिनका आज जन्मदिन होता है।
26 अप्रैल 1953 को कलकत्ता में जन्मीं मौसमी आज 66 साल की हो रही हैं, लेकिन 70-80 के दशक में मौसमी चटर्जी पर्दे के सबसे हसीन और जवां चेहरों में से एक थीं, उन्में जितनी सादगी थीं उतनी ही शोखी भी। खास बात ये है कि मौसमी ने अपनी फिल्मी पारी की शुरूआत शादी के बाद की थी और भी 18 साल की उम्र में। आज मौसमी के जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनके जीवन से जुड़े ऐसे ही कुछ रोचक तथ्यों से रूबरू कराने जा रहे हैं।
मौसमी चटर्जी ने महज 14 साल की उम्र में सिनेमा में कदम रखा था... पर्दे पर वो पहली बार साल1967 में प्रदर्शित बंगला फ़िल्म ‘बालिका वधू’ में नजर आई थीं। ये फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर जितनी सुपरहिट रही, उतनी चर्चाएं मौसमी की भी हुई।
बालिका बधू के बाद मौसमी ने साल 1972 में प्रदर्शित फ़िल्म अनुराग से हिंदी सिनेमा की तरफ अपना रूख किया। इस फ़िल्म में मौसमी ने एक नेत्रहीन लड़की का किरदार निभाया था, ऐसे में कैरियर की शुरूआत में ही इस तरह का किरदार किसी नई अभिनेत्री के लिए जहां जोखिम भरा हो सकता था पर वहीं मौसमी ने अपने संजीदा अभिनय से फिल्म दर्शकों के साथ ही समीक्षको को भी मंत्रमुग्ध कर दिया। अपनी पहली ही हिंदी फ़िल्म के लिए मौसमी को फ़िल्मफेयर अवार्ड के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नॉमिनेट किया गया।
इसके बाद मौसमी के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई साल 1974 में आई फिल्म रोटी कपड़ा और मकान। इस फिल्म के समय मौसमी की शादी हो चुकी थी और वो मां बनने वाली थीं। वहीं फिल्म में वो एक रेप सरवाइवर लड़की तुलसी का किरदार रही थीं, ऐसे में इसके शूटिंग के दौरान उन्हें काफी मुश्किल हुई थी। यहीं नहीं इस फिल्म में उन पर फिल्माए गए रेप सीन के दौरान ऐसा गंभीर हादसा भी हुआ था, जिसके चलते उन्हें हास्पिटल में एटमिट करना पड़ा था। असल में एक इंटरव्यू के मौसमी ने खुद इसके बारे में बताया था कि कैसे वो इस हादसा का शिकार हुई थीं। मौसमी के अनुसार रेप सीन के दौरान उन पर ढेर सारा आटा गिर गया, जिसके चलते उन्हें चोट आई और ब्लीडिंग होने लगी थीं, ऐसे में उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। मौसमी कहती हैं कि मैं खुशकिस्मत थी कि मैंने बच्चे को नहीं खोया।
मौसमी चटर्जी ने लंबे फिल्मी करियर में संजीव कुमार से लेकर जीतेन्द्र, राजेश खन्न और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े हीरो के साथ काम किया। फिल्मों की बात करें तो 'जहरीला इंसान', 'कच्चे धागे', 'संतान', 'जल्लाद', ‘स्वर्ग नरक', 'फूल खिले है गुलशन गुलशन', 'मांग भरो सजना', 'ज्योति बने ज्वाला', 'दासी', 'अंगूर', 'घर एक मंदिर', जैसी सुपरहिट फिल्मों में मौसमी ने अपने अभिनय का जौहर बिखेरा है।
वहीं वो बड़े पर्दे पर आखिरी बार साल 2015 में आई फिल्म 'पीकू' में नजर आई थीं।
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