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वास्तविकता में कहा जाए तो परवरिश की परिभाषा हर कोई नहीं दे पाएगा। यह एक ऐसी चीज जिसे माता-पिता अपने होने वाले बच्चों को देते हैं। बचपन से ही हर मां बाप अपने बच्चों को अच्छे और बुरे में फर्क समझाते हैं तथा वह हर कार्य करने को प्रेरित करते हैं चलिए जानते हैं छोटे बच्चों की परवरिश कर हम किस प्रकार उनका ध्यान रख सकते हैं।
छोटे बच्चे हमेशा कच्चे घड़े के समान होते हैं, अतः बच्चों को जीवन से संबंधित वह हर चीज सिखाएं जो उनके लिए उपयोगी रहेगी। बच्चों को हमेशा कुछ नया सीखने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि यह एक ऐसी उम्र है जिसने बच्चा हमेशा नई नई चीजों की ओर जल्दी आकर्षित होता है और माता पिता उन्हें अगर भविष्य से संबंधित चीजों के बारे में समझाएंगे, तो वह उन चीजों के प्रति अपनी उत्सुकता दिखाएंगे और कार्य को बहुत अच्छे तरीके से कर पाएंगे।
बच्चे की परवरिश के लिए सबसे मुख्य बात यही है कि घर का माहौल हमेशा खुशनुमा होना चाहिए, क्योंकि अगर एक अच्छे घर का उदाहरण बच्चे स्वयं अपने घर में देखेंगे तो इन चीजों से वह बहुत कुछ सीखेंगे। इनके अलावा माता पिता का सबसे बड़ा कर्तव्य यह है कि अपने बच्चों से दोस्तों की तरह रहें, और उनके अच्छे बुरे में उन्हें समझाए। बच्चों का यह उम्र ऐसा होता है जिसमें माता-पिता से वह डरते हैं। अतः उनके अंदर इन बात को अगर आप निकाल देंगे, तो बच्चे भी मित्रों की तरह ही माता पिता के साथ रहने लगेंगे जिससे उनकी परवरिश और भी ज्यादा अच्छी हो सकेगी।
बच्चों को हमेशा शिष्टाचार सिखाएं, और अनुशासन उनके लिए बहुत जरूरी है तथा उन्हें ऐसा चीज दिखाएं जो उनकी लिए ही बेहतर हों। किसी की इज्जत कैसे कि जाती है बच्चों को अगर माता-पिता सिखाएंगे तो बच्चे इससे जल्दी सीखेंगे और समाज से संबंधित वह कार्य उन्हें सिखाएं जिससे वह आगे चलकर एक बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ सके।
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