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EC इतना क्यूट है कि मैं बता नहीं सकता। जी हाँ, इसकी क्यूटनेस देखनी है तो ज़रा बुंदेलखम्ड चले जाइए। आज जबकि 29 अप्रैल, 2019 को आम चुनाव के वोट पड़ रहे हैं और आगामी 6 मई, 2019 को पाँचवे चरण के भी मतदान इस इलाक़ें में पड़ने हैं, बावजूद इसके आपको एक बड़ी पार्टी के दीवालों जितने बड़े-बड़े फ़्लैक्स-बोर्ड और होर्डिंग्स यहाँ देखने को बेहद सहजता से मिल जाएंगी। अभी बीते हफ़्ते जब मैं बुंदेलखण्ड के झाँसी और उसके आसपास के इलाक़ों में घूम रहा था, तो ये फ्लैक्स-बोर्ड मुझे EC की ही याद दिला रहे थे, ख़ासकर इसकी क्यूटनेस के।
बहरहाल, आपको असल मुद्दे पर लेकर आते हैं। बुंदेलखण्ड में आचार संहिता लगी होने के बावजूद राजनैतिक पार्टियों के इतने बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लगे हैं कि साफ दिखते हैं। इसके अलावा भी देश के दूसरे कुछ अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही झलकियाँ आम हैं। ऐसे में ज़रा सोचिए EC का आकाशवाणी के आपकी फ़रमाइश वाले सेगमेंट में उन गानों को सुनाने से मना करना क्या दर्शाता है, जिसमें कि किसी भी चुनाव चिन्ह का आंशिक ज़िक्र भी आता है तो उसे सुनाने से मना कर दिया जाता है।
जी हाँ, दरअसल, आकाशवाणी आपकी फरमाइश कार्यक्रम में श्रोताओं को ऐसे गानों को सुनाने से मना कर रहा है, जिसमें किसी राजनीति दल के चुनाव चिन्ह का जिक्र आता है। यही नहीं, उन फिल्मी कलाकारों से जुड़े गानों को भी नहीं सुनाया जा रहा है, जो चुनाव लड़ रहे हैं या किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं।
आपको बता दें कि आकाशवाणी को जब एक श्रोता ने साल 1968 में आयी फ़िल्म सरस्वती चन्द्र का गाना भँवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राजकुँवर सुनने की फरमाइश भेजी तो आकाशवाणी ने इस गीत को सुनाने से मना कर दिया। उसने सके लिए आचार संहिता का कारम बताया। ऐसे ही सुन-सुन-सुन मेरे साती, मेरे हाथी गीत को भी बजाने से रोक दिया गया। इन गीतों के अलावा भी EC न कई अन्य गीतों और न कलाकारों के गीतों पर रोक लगाई है, जो आम चुनाव में प्रत्याशी हैं।
Author: Amit Rajpoot
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