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एक सवाल सभी के मन-मस्तिष्क में अक्सर उठता है कि आखिर भगवान कैसे दिखाई देते हैं, क्या उनका कोई शारीरिक स्वरूप है भी या नहीं और अगर है तो कैसा। इस सवाल का जवाब तो नहीं पर लोगों की ऐसी जिज्ञासा को सालों पहले एक व्यक्ति ने अपने चित्रकला के जरिए काफी कुछ शांत किया था । दरअसल, हम बात कर रहे हैं 19वीं सदी के प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा की, जिसने अपनी कला के जरिए हिंदू धर्म के देवी-देवताओं के मंदिरों से निकालकर लोगों के घरों तक ले गए। आज उनके जन्मदिवस के मौके पर हम आपको उनसे और उनकी कला से परिचय करान जा रहे हैं।
दरअसल, राजा रवि वर्मा ने अपनी कला के जरिए भगवान को इसांनी शक्ल लेकर उनका परिचय आम जनता से कराया। उससे पहले देवी देवता सिर्फ मदिंरो में ही विराजमान थें और वहां भी सिर्फ चंद लोगों का जाने का अधिकार था। असल में उस वक्त के सामाजिक व्यवस्था के चलते जाति विशेष के लोगों को ही मंदिरों में जाने की इजाजत थी। ऐसे में बाकि वर्ग के लोग तो भगवान के स्वरूप से वंचित थें। ऐसे में राजा रवि वर्मा ने अपनी चित्रकला के जरिए देवी-देवताओं के अक्श को कागज के पन्नों पर उकेरा और उसके माध्यम से देवी-देवता घर-घर पहुंच गए।
राजा रवि वर्मा का जन्म 29 अप्रैल 1848 को त्रावणकोर रियासत में हुआ था... उनके पिता आयुर्वेद के जानकार थे, वहीं उनकी मां लेखिका थी। लेकिन उन्होंने चित्रकला का गुर अपने चाचा से सीखा था। ऐसे में रवि वर्मा जब करीब 14 साल के थे तभी उनके चाचा ने उनकी प्रतिभा को पहचान उन्हें त्रावणकोर के राजमहल पेटिंग सिखाने ले गए। वहां वाटर पेंटिंग के महारथी रामास्वामी नायडू से उन्होंने चित्रकारी के गुर सीखे और जल्द ही वो वाटर पेंटिंग के उस्ताद बन गए।
इसी विधा के जरिए पौराणिक कथाओं को चित्रों का रूप दिया और इस तरह राजा रवि वर्मा के पेंटिग्स के जरिए देवी-देवता का दर्शन मदिरों के बाहर किसी रूप में हो सका । इसके बाद राजा रवि वर्मा ने नेदरलैंड्स के मशहूर चित्रकार थियोडोर जेनसन से ऑयल पेंटिंग्स की कला सीखी और उसे भारत में मशहूर किया।
राजा रवि वर्मा को इन्ही ऑयल पेंटिंग्स की जरिए लोकप्रियता मिली । दरअसल, भारत के लिए ऑयल पेंटिंग की विधा भारत में पूरी तरह नई थी और इसकी खासियत ये थी कि इससे बनी पेंटिस सालों तक सुरक्षित रहती थीं। इसके बाद राजा रवि वर्मा ने अपनी प्रिंटिंग प्रेस भी लगाई और फिर उसके जरिए छपे चित्रों में ईश्वर को चित्र दर्शा उन्हें भारत के आमजनों के घर में पहुंचा दिया।
हालांकि इस प्रयास में राजा रवि वर्मा को कई सारे विवादों का भी सामना करना पड़ा। दरअसल, उनके द्वारा बनाए गए देवी-देवताओं के चित्रों पर कई पुरातन पंथियों ने सवाल उठाए और राजा रवि वर्मा पर ये आरोप लगा कि उन्होने मुनाफा कमाने के लिए भारतीय देवियों के अश्लील चित्र बनाकर उनका अपमान किया है। ऐसे में उन पर कई मुकद्मे भी चले, हालांकि इन विवादो से परे देखा जाए तो चित्रकला की दुनिया में राजा रवि वर्मा की छवि किसी महानायक से कम नही है।
Author: Yashodhara Virodai
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