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गोरखपुर उत्तर प्रदेश का एक अत्यन्त प्रसिद्ध ज़िला है। यहाँ का रेलवे प्लेटफ़ार्म दुनिया का सबसे बड़ा प्लेटफ़ार्म है। गोरखनाथ का धाम यहीं है, जहाँ भगवान गोरखनाथ ने तपस्या की थी और नाथ संप्रदाय का प्रवर्तन भी किया था। ग़ौरतलब है कि भारत सहित दुनिया के अन्य हिस्सों में सनातन धर्म से संबंधित पुस्तकों आदि का छापने वाले जो सबसे बड़ा प्रकाशक है वह भी इसी गोरखपुर सङर में ही स्थित है। इस सुप्रसिद्ध प्रेस का नाम गीता प्रेस है। आपको बता दें कि गोरखपुर में इन सब तमाम बातों के अलावा एक और जो सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है, जिसे बहुत कम ही लोग जानते हैं और वह है यहाँ का कुसम्ही जंगल।
जी हाँ, आपको बता दें कि कुसम्ही जंगल का सम्पर्क दो देशों में हैं। यह गोरखपुर से फैलता हुआ उत्तर दिशा में नेपाल की सीमा को पार कर जाता है। मालूम हो कि कुसम्ही जंगल शहर के रिहायशी इलाक़े से दूर गोरखपुर-कुशीनगर नेशनल हाईवे के पास से शुरू होता है। कुसम्ही जंगल में स्थापित एक देवी का मन्दिर है, जिनको बुढ़िया माई के नाम से जाना जाता है।
इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर एक चमत्कारी वृद्ध महिला के सम्मान में बनाया गया था। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि पहले यहां थारू जाति के लोग निवास करते थे। वे जंगल में तीन पिंड बनाकर उसे वन देवी के रूप में पूजा करते थे। थारुओं को अक्सर इस पिंड के आसपास सफेद वेश में एक वृद्ध महिला दिखाई दिया करती थी, जो कुछ ही पलों में वह आँखों से ओझल भी हो जाती थी। ऐसे में लोगों ने माना कि ये देवी ही हैं, जो बूढ़ी माई के रूप में दर्शन देती हैं।
बहरहाल, गोरखपुर का ये कुसम्ही जंगल ऐसे ही कई और भी रहस्यों से भरा हुआ है। यदि आप जंगल प्रेमी हैं या फिर आपको जंगल का रोमांच अच्छा लगता है तो आप जब भी गोरखपुर का रुख़ करें तो कुसम्ही जंगल में ज़रूर घूमने पहुँचें, यहाँ आपको काफी अच्छा लगेगा और जैव विविधता वाले इस जंगल में आपको रोमांच के साथ-साथ थोड़ा सुकून भी मिलेगा।
Author: Amit Rajpoot
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