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जापान के नये सम्राट नारुहितो देश में रेइवा युग प्ररम्भ करने जा रहे हैं। जी हाँ, आपको बता दें कि यह पूरी दुनिया के लिए बेहद रोमांचक और दिलचस्प ख़बर है कि जापान के शाही परिवार में एक नये युग की शुरुआत हुयी है। इससे जापान सहित उसके मित्र राष्ट्रों में ख़ुशी की लहर है। मालूम हो कि भारत जापान का बहुत ही पुराना और घनिष्ट मित्र है। यहाँ सम्राट अकिहितों के पदवी छोड़ने के बाद उनके बेटे नारुहितो ने जापानी राजवंश की पवित्र गद्दी संभाली है। ग़ौरतलब है कि सम्राट अकिहितो जापानी राजवंश के पिछले 200 वर्षों के इतिहास में पद त्याग करने वाले पहले सम्राट हैं।
आपको बता दें कि 59 वर्षीय नारुहितो ने बुधवार की सुबह एक समारोह में औपचारिक रूप से 'क्रिसेंथमम थ्रोन' (राजगद्दी) ग्रहण किया। इसके साथ ही जापानी राजशाही का नया युग 'रेइवा' (सुन्दर समन्वय व सौहार्द) शुरू हो गया है। यह बात जानना बहुत ही ज़रूरी है कि आख़िर सम्राट नारुहितो के जापान का नया शासक बनते ही अचानक से रेइवा युग का क्या मतलब है। दुनिया में हर कोई कह रहा है कि जापान का नया युग शुरू हो गया है, जिसे रेइवा यानी की बेहतरीव समन्वय का युग कहा जा रहा है।
दरअसल, जापान में प्रत्येक सम्राट के राज्यारोहण पर एक नयी परंपरा का शब्दघोष निर्धारित किया जाता है। इसी क्रम में जापान के नये सम्राट नारुहितो का राज्यकाल रेइवा अर्थात् सुन्दर समन्वय के नाम से जाना जायेगा। ये बात भी जानने योग्य है कि जापान के सम्राट प्राचीन सदाबहार सिंहासन (गुलदाऊदी फूल के नाम पर), जिसे जापान की शिंतो परंपरा में बहुत ही पवित्र माना जाता है, आसीन होकर अपने पारंपरिक कर्तव्य का निर्वाह करते हैं। बात करें नारुहितो के जापान के नये सम्राट बनने से भारत पर पड़ने वाले प्रभावों की तो ऐसा माना जा रहा है कि इससे भारत-जापान मैत्री पहले से और अधिक ऊर्जावान और घनिष्ठ होगी।
Author: Amit Rajpoot
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