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हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि क़िताबों से अच्छा कोई दोस्त नहीं होता है, लेकिन जीवन की सच्चाई में इस बात को क़रीब से समझने वाले बहुत ही कम लोग होते हैं। यूँ तो हम अपने जीवन की राह में मिलने वाले तमाम अल्पकालिक मित्रों के साथ संगति करते हैं और उन पर ख़ूब सारा पैसा भी ख़र्च करते हैं, लेकिन ये जो क़िताबे हैं आपकी मरहूम दोस्त, इनकी भला कौन सुध लेता है और जो सुध लेता है वह बन जाता है जय प्रकाश मिश्र। जी हाँ, जय प्रकाश मिश्र यूँ तो पेशे से पत्रकार हैं, लेकिन क़िताबों की दुनिया में इनका दख़ल बड़ा ही दिलचस्प है।
जहाँ एक ओर लोग क़िताबों पर पैसा नहीं ख़र्च करते हैं वहीं एक दूसरा तबका ऐसा भी है जो पैसे लगाकर ख़रीदी गयी अपनी क़िताबों को कबाड़ के भाव बेंच देता है। इसके अलावा क़िताबों से जुड़ा एक पहलू यह भी है कि हमारे समाज में ऐसे भी कुछ बच्चे हैं, जो बेहतर ढंग से पढ़ना चाहते हैं और जीवन में कुछ करना चाहते हैं। लेकिन ऐसे बच्चों के हाथों में क़िताब का उपलब्ध हो पाना एक जटिल सपने जैसा होता है। क़िताबों से जुड़ी इन तमाम विसंगतियों को दुरुस्त करने वाले शख़्स हैं जय प्रकाश मिश्र।
जय प्रकाश मिश्र का जन्म बिहार के गोपालगंज ज़िले के लुहसी गाँव में हुआ है। इनका बचपन बेहद मुफ़लिसी में बीता है, जिसके चलते ये अपने मन में पढ़ाई का सपना लिये क़िताबों से हमेशा महरूम ही बने रहे। हालांकि पत्राचार ने इनके जीवन में ज्ञान का उँजियारा क़ायम रखा और जय प्रकाश पढ़ने की अपने मज़बूत इच्छा की बदौलत पत्रकारिता में निष्णात हो गये। इसके बाद इन्होंने नौकरी भी की। लेकिन जय प्रकाश के मन में ये टीस हमेशा भरी रही कि उनका बचपन तो क़िताबों से दूर रहा लेकिन वह अब अपने आसपास किसी भी ग़रीब बच्चे को कम से कम क़िताबों से महरूम तो नहीं होने देंगे।
इसके लिए जय प्रकाश मिश्र ने दिल्ली में अपनी अच्छी-भली नौकरी छोड़ दी और ‘फ़ाउंडेशन ज़िन्दगी’ बनाया। इसके तहत उन्होंने गोपालगंज ज़िले के जादोपुर दुखहरण गाँव में सामुदायिक पुस्तकालय की शुरुआत की है। इस पुस्तकालय में एक से बढ़कर एक बेशकीमती क़िताबें मौजूद हैं। जय प्रकाश के इस प्रयास से अब इस गाँव के आसपास के लगभग 35,000 लोग लाभान्वित हो रहे हैं। वास्तव में जय प्रकाश मिश्र जैसे लोग समाज के लिए बड़े प्रेरणास्रोत हैं, जिनसे प्रेरणा लेकर लोगों को इस तरह के प्रयास अपने आसपास करने चाहिए, ताकि ज्ञान की रोशनी कहीं मद्धिम न पड़ने पाये।
Author: Amit Rajpoot
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