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आज अक्षय तृतीया का त्योहार हैं, जो कि वैशाख मास के शुक्‍ल पक्ष की तृतीय तिथि को मनाई जाती है। वैसे इसके बारे में आप सबने ये तो जरूर सुना होगा कि ये दिन सोने की खरीदारी और दूसरे शुभ कार्यों के लिए सबसे उपयुक्त दिन माना जाता है। पर क्या आप इसे मनाने की असली वजह जानते हैं। अगर नहीं, तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है और इस दिन का पौराणिक महत्व क्या है?
धरती पर गंगा का अवतरण
जी हां, पौराणिक मान्यताओं की माने तो भागीरथ के हजारों वर्षों के तपस्या के फलस्वरूप इसी दिन देवी गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरीत हुई थीं। ऐसे में इस दिन गंगा में स्नान करना बेहद ही कल्याणकारी माना जाता है।
भगवान विष्‍णु के छठें अवतार के रूप में परशुराम का जन्म
वहीं एक दूसरी मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान विष्‍णु के छठें अवतार माने जाने परशुराम का जन्म हुआ था। यही वजह है कि इस दिन भगवान विष्णु और परशुराम जी की पूजा अर्चना करने का विधान है।
मां अन्नपूर्णा का जन्म
अक्षय तृतीया के पीछे की एक पोराणिक मान्यता ये भी है कि इसी दिन मां मां अन्नपूर्णा का जन्म हुआ था। ऐसे में इस दिन भंडारे और गरीबों को भोजन कराने का विधान है, साथ ही मान्यता है कि इस दिन रसोई घर की पूजा करने से घर में धन-धान्य की वृद्धी होती है।
महाभारत का लेखन प्रारम्भ
वहीं इसके पीछे एक कथा ये भी प्रचलित है कि अक्षय तृतीया के दिन ही म‍हर्षि वेदव्‍यास जी ने महाभारत लिखना शुरू प्रारम्भ किया था, जो कि पांचवे वेद के रूप में जाना जाता है और इसमें गीता भी समाहित है। ऐसे में अक्षय तृतीया के दिन श्रीमद्भागवत गीता के 18वें अध्याय का पाठ करना शुभ माना जाता है।
Author: Yashodhara Virodai
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