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सुमेधा कुशवाहा आईटीएस डेंटल कॉलेज से बीडीएस और फिर एमडीएस की डिग्री हासिल कर चुकी हैं। ये मूल रूप से एक डेंटिस हैं और तंबाकू के ख़िलाफ़ जागरुकता अभियान चलाती हैं। डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान सुमेधा कुशवाहा ने कैंसर की भयावहता और देश में इसके व्यापक प्रसार के बारे में जाना। सुमेधा को इस दौरान उनके टीचर्स ने ये बताया था कि कैंसर के बढ़ते आँकड़े की वजह तम्बाकू का बढ़ता चलन है। बड़ी संख्या में छोटे बच्चे भी तंबाकू का सेवन करते हैं, जिस कारण उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनमें से अनेक में कैंसर के लक्षण दिखाई पड़ जाते हैं। सुमेधा कुशवाहा को इन सब बातों ने बेहद हैरान कर दिया था।
हैरानी की बात है कि अपने विद्यार्थी जीवन में तम्बाकू के प्रति ऐसी जानकारी पाकर सतर्क रहीं सुमेधा कुशवाहा को उनके जीवन में पति के रूप एक ऐसा इंसान मिल गया जो कि यद्यपि ख़ुद एक डॉक्टर हैं, लेकिन वह चेन स्मोकर थे। वह एक दिन तीस सिगरेट पी जाते थे। सुमेधा कुशवाहा इससे बेहद परेशान रहने लगीं और स्टुडेंट लाइफ़ में कैंसर के प्रति उनकी जानकारी ने कुछ ऐसा करने पर मज़बूर कर दिया जिससे कि उनके पति चेन स्मोकिंग की लत छोड़ सकें। यहीं से सुमेधा कुशवाहा ने तम्बाकू के ख़िलाफ़ ज़मीनी जंग छेड़ दी।
साल 2014 में सुमेधा ने अपने कुछ डॉक्टर्स दोस्तों के साथ मिलकर एटीटीएसी नाम की एक संस्था का गठन किया, जिसका लक्ष्य उन्होंने तय किया तंबाकू के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाना, तंबाकू की आदत छुड़ाना, तंबाकू का अधिक इस्तेमाल करने वालों को सचेत करना, रणनीति बनाना, मदद करना और फॉलो-अप लेना। सुमेधा का प्रयास धीरे-धीरे रंग लाने लगा। उनके पति ने पूरी तरह से तंबाकू को न कह दिया। इसके बाद तो मानों सुमेधा को उम्मीदों के पंख लग गये हों। पाँच सालों के भीतर ही उनके प्रयासों से 30,000 लोग तम्बाकू छोड़ चुके हैं।
Author: Amit Rajpoot
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