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बॉलीवुड में इन दिनो बायोपिक बनाने का चलन जोरो पर है, इसी कड़ी में अब भारत की महान गणितज्ञ शकुंतला देवी की बायोपिक बनने जा रही है, जिसमें लीड रोल में नजर आएंगी विद्या बालन। जाहिर है, विद्या बालन जैसी दिग्गज एक्ट्रेस अगर किसी शख्सियत को पर्दे पर जीवंत करने जा रही हैं तो वो काफी दमदार होगा और शकुंतला देवी ऐसी ही महान शख्सियत है, जो अपने आप में मिसाल रह चुकी हैं। उन्हें दुनिया 'ह्यूमन कंप्यूटर' के रूप में जानती है, हालांकि ज्यादातर देशवासी अभी भी इनके बारे में नहीं जानते हैं। अगर आप भी उन्ही में से एक हैं, तो चलिए आपका परिचय शकुंतला देवी से करवाते हैं, जिनका नाम जितना ही पारम्परिक है, उनके कारनामे उतने ही एडवांस हैं।
जी हां, शकुंतला देवी की प्रतिभा समय से काफी आगे की थी, आज हमें अगर दो अंको की जोड़-भाग करनी हो तो हम कैलकुलेटर का सहारा लेते हैं। पर उनके लिए पेचीदा कैल्कुलेशन भी बाएं हाथ का खेल था... उन्होने उस वक्त में मैथमेटिक्स में कंप्यूटर को हराया था। यही वजह रही है कि दुनिया की कई बड़ी नामी यूनिवर्सिटीज इनके नाम का लोहा मानती है।
चार साल की उम्र में दिखाया था मैथ का जादू
शकुंतला का जन्म बेंगलुरु के कन्नड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था, उनके पिता एक सर्कस में काम करते थे। गणित में शकुंतला की दक्षता का अंदाजा सबसे पहले इनके पिता को पता चला। ऐसे में उन्होने सर्कस छोड़कर शकुंतला के रोड शो कराने शुरू किए, जिसके चलते बिना कम में उम्र में ही शकुंतला काफी प्रसिद्ध हो गई। ऐसे में साल 1944 में मात्र 6 साल की उम्र में उन्हें मैसूर यूनिवर्सिटी में आमंत्रित किया गया, उन्होने अपनी गणित के जादू से लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। इसके बाद वो 1944 में ही अपने पिता के साथ रहने लंदन रहने चली गईं।
इसलिए कहलाई 'ह्यूमन कम्प्यूटर’
शकुंतला 'ह्यूमन कम्प्यूटर’ क्यों कहलाती हैं, इसकी भी अपनी एक कहानी है। असल में साल 1977 में शकुंतला देवी को अमेरिका बुलाया गया था, जहां डलास की यूनिविर्सटी में उनका मुकाबला कंप्यूटर ‘यूनीवैक’ से रख गया था। इसमें शकुंतला को 201 अंकों की एक संख्या का 23वां मूल निकालना था, जिसके लिए उन्होने जहां सिर्फ 50 सेकंड लिए। वहीं इसके लिए ‘यूनीवैक’ ने 62 सेकंड का समय लिया। ऐसे में इस घटना के बाद इन्हें दुनियाभर में ह्यूमन कम्प्यूटर’ के नाम से जाना जाने लगा।
साल 1982 में मिला गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड
इसके बाद 18 जून, 1980 को लंदन के इम्पीरियल कॉलेज में भी उन्होंने मैथ का कुछ ऐसा ही जादू दिखाया था, जब 13 अंकों की संख्याओं 7,686,369,774,870 X 2,465,099,745,779 के गुणा को महज 28 सेकंड में हल कर दिया था। इनका ये कारनामा साल 1982 में गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। गणित की ये महान ज्ञाता शकुंतल देवी ने 21 अप्रैल 2013 के दिन अपनी अंतिम सांस ली।
Author: Yashodhara Virodai
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