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वैसे तो दोस्त बनने या बनाने की कोई सही नियम नहीं हैं, क्योंकि दोस्त वहीं है जो आपको दिल को भाए, जो आपके मुश्किल घड़ी में काम आए। लेकिन चूंकि आपके सम्बंधो का आपके निजी जीवन पर काफी हद तक असर पड़ता है, इसलिए विद्वानों ने कहा है कि दोस्ती जांच परख कर ही करनी चाहिए। इसके लिए महाभारत के वनपर्व में बताया गया है कि किसी को मित्र बनाने से पहले उसके बारे में कौन कौन सी बातों का जांच परख लेना आवश्यक है।
दरअसल, महाभारत के वनपर्व में एक श्लोक का उल्लेख मिलता है...
येषां त्रीण्यवदातानि विद्या योनिश्च कर्म च।ते सेव्यास्तैः समास्या हि शास्त्रेभ्योपि गरीयसी।।
इस श्लोक के अनुसार किसी से भी दोस्ती करने से पहले उसकी शिक्षा-दिक्षा, उसकी परवरिश और उसकी आदतों के बारे में आपको पता कर लेना चाहिए। चलिए आपको इस बारे में जरा विस्तार से समझाते हैं।
व्यक्ति के ज्ञान और शिक्षा के स्तर की जानकारी
जी हां, दोस्ती करने से पहले व्यक्ति के ज्ञान और शिक्षा के स्तर की जानकारी होना बेहद जरूरी हैं। क्योंकि अगर सामने वाला बेहद अज्ञानी है तो ऐसे व्यक्ति के साथ आपका बौद्धिक स्तर मेल नहीं खाएगा। वहीं अगर वो शिक्षित नहीं है तो भी उसके अशिक्षा का असर आपके रिश्ते पर जरूर पड़ेगा।
परिवेश का ज्ञान
दोस्ती करने से पहले व्यक्ति के परिवेश के बारे में बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर कोई दुष्ट या अपराधी परिवेश का है, तो निश्चित तौर पर उसमें उसके परिवेश का अंश होगा। ऐसे में ऐसे व्यक्ति से दोस्ती आप पर भारी पड़ सकती है।
व्यक्ति की आदतों और पेशे से परिचित होना
दूसरे व्यक्ति से दोस्ती करने से पहले आपको उसकी आदतों और पेशे से परिचित होना जरूरी है... कि कहीं वो व्यक्ति किसी गलत पेशे में तो नहीं है, या फिर उसे कोई गलत आदत तो नहीं है, ताकी आगे चलकर आपको कोई परेशानी ना उठानी पड़ें।
Author: Yashodhara Virodai
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