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हम सभी ने अपने बचपन में ये बात ज़रूरी सुनी होगी कि समाज में कोई भी परिवर्तन करने से पहले उसे अपने घर से शुरू करना चाहिए। हालाँकि इसे हममें से बहुत ही कम लोगों ने अपने जीवन में उतारा है या फिर यूँ कहें कि बहुत ही कम लोग उतार पाते हैं। लेकिन देवेन्द्र सूरा उन कुछ गिने-चुने जांबाजों में से एक हैं जिन्होंने इस बात को अपने जीवन में पूरी तरह से अमल किया है। वाकई ऐसे बड़े काम जिन्हें हम अपने गर से ही शुरू कर देते हैं एक दिन दुनिया के लिए मिसाल बन जाते हैं।
ऐसा ही हुआ है जांबाजों के साथ जब इन्होंने पूरे के पूरे शहर को पक्षी-विहार बनाने की ठान ली। लेकिन इसके लिए इन्होंने एक भी पेड़ शहर के किसी दूसरे इलाक़े में लगाने की बजाय पहला पेड़ अपने ही घर पर लगाया और देखते-देखते आज शहर की रंगत ऐसी हो गयी है कि इससे देवेन्द्र सूरा के राज्य हरियाणा में उनकी न सिर्फ़ मिसाल दी जाती है, बल्कि लोग उनके पद-चिह्नों पर चलने का प्रयास करते हैं।
आपको बता दें कि देवेन्द्र सूरा पेशे से चंडीगढ़ पुलिस में कांस्टेबल हैं। इन्होंने पहले सोनीपत और फिर पूरे हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर अभियान चलाया है। दिलचस्प है कि देवेन्द्र सूरा अपनी नौकरी का पूरा वेतन पौधारोपड़ पर ही खर्च कर देते हैं। अब इसको वस्तार देने के लिए ये हर गाँव जाकर 20-30 लड़कों की समिति बनाते हैं, जो वहाँ रोपे गये पौधों की देखरेख करते हैं। ऐसे 182 गाँवों में 8000 से ज़्यादा पर्यावरण-मित्र बनाकर देवेन्द्र सूरा ने लगभग डेढ़ लाख से ज़्यादा पौधे लगवा दिये हैं।
इसके अलावा देवेन्द्र सूरा ने ढाई लाख से ज़्यादा पौधे स्कूल, कॉलेजों, शादी समारोहों, रेलवे स्टेशनों और मंदिरों आदि में जाकर बाँटे हैं। वास्तव में देवेन्द्र सूरा का लक्ष्य पूरे के पूरे शहर को पक्षी-विहार बना देने का है। दिलचस्प है कि देवेन्द्र सूरा ने जहाँ अदिक पेड़ लगाये हैं, वहाँ 8000 मिट्टी के बर्तन और तक़रीबन 10,000 लकड़ी के घोसले भी रखवाये हैं, ताकि यहाँ पक्षियों का बसेरा भी हो सके।
Author: Amit Rajpoot
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