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लिपस्टिक महिलाओं के होठों को पहले से अधिक ख़ूबसूरत बनाने का कृत्रिम साधन है। इसे महिलाएँ हर रोज़ अपने मेक-अप में प्रयोग करती हैं। जी हाँ, लिपस्टिक का महिलाओं के मेक-अप में विशेष महत्व होता है। इधर बीच लिपस्टिक का प्रयोग पहले से अधिक बढ़ा है और शहरों में इसका प्रयोग अब आम हो गया है। आपको बता दें कि ग्रामीण इलाक़ों में आज जहाँ लिपस्टिक के प्रति वहां की लड़कियों का आकर्,म बढ़ रहा है वहीं, बात शहरों की करें तो यहाँ लिपस्टिक का प्रयोग आज न केवल महिलाओं बल्कि लड़कियों के लिए भी बेहद आम है। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में लिपस्टिक के ये अलग-अलग रंग आते कहाँ से हैं।
जी हाँ, आपको बता दें कि यूँ तो हमारे बीच बहुत सी महिलाएँ और लड़कियाँ हर रोज़ अपने होठों पर लिपस्टिक लगाती हैं। लेकिन शायद उन्हें ये नहीं मालूम होगा कि उनके होठों पर हर रोज़ लगने वाली ये लिपस्टिक बनती कैसे है। चलिए, यदि आपको इससे पहले नहीं मालूम था कि हमारे देश में लिपस्टिक में रंग किससे भरे जाते हैं या किस चीज़ का प्रयोग इसमें होता है, तो आज हम आपको इसकी विस्तृत जानकारी देंगे।
आपको बता दें कि आन्ध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी ज़िले से लिपस्टिक का बेहद ख़ास नाता है। लिपस्टिक में रंग भरने के लिए के लिए यहाँ एक ख़ास तरह का पौधा उगाया जाता है, जिसका नाम है- अनाटो। जी हाँ, लिपस्टिक के रंग के लिए प्रयोग होने वाले अनाटो पौधे के बीज पूर्वी घाट पर्वत के अट्टिगला और मारेडमिली में उगाये जाते हैं।
दिलचस्प है कि अनाटो के पौधे जंगलों में ख़ुद उगा करते हैं। लेकिन इनमें इतनी अधिक आर्थिक क्षमता होती है कि लोग अब इसकी खेती करके लाखों पैसे कमा रहे हैं। आपको बता दें कि लिपस्टिक में जो नेचुलर कलर आता है, वह इन्हीं अनाटो पौधों के बीजों का कमाल है। इसके अलावा इनके उपयोग कपड़ों की रंगाई, बालों के लिए बनाई जाने वाली डाई और खाद्य प्रसंस्करण में किये जाते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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