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भगवान बुद्ध के पास एक व्यक्ति आया और वह क्षत्रिय था। उस क्षत्रिय में ज्ञान का बहुत बड़ा संसार था और वह काफी विद्वान था। इस व्यक्ति की विद्वता के आगे बड़े-बड़े ज्ञानी हार मान गये थे। जहाँ कहीं भी विद्वता की बात आती या शास्त्रार्थ होता यह व्यक्ति अपने तर्क से सबको हैरान कर देता था। इस व्यक्ति को इस बात का अहंकार था कि उसके आगे बड़े-बड़े विद्वान हार मान जाते हैं और क्षण मात्र भी टिक नहीं पाते हैं। आपको बता दें कि उस व्यक्ति ने जब भगवान बुद्ध के बारे में सुना कि उन्हें परम् ज्ञान की प्रार्ति हुयी है, तो उसे लगा कि उसको एक और मौक़ा मिल गया अपनी विद्वता को दिखाने का। उसने तय किया कि वह भगवान बुद्ध के पास जाकर शास्त्रार्थ करेगा और उनके ज्ञान को झूठा साबित करेगा, जिससे उसकी ख्याति और भी बढ़ जाये।
रास्ते में ही उस व्यक्ति को ये मालूम पड़ा कि भगवान बुद्ध तो ईश्वर की बात ही नहीं करते हैं। तब उसने सोचा कि वह अब तो बुद्ध से ईश्वर के बारे में ही पूँछेगा। ये सोचकर वह बुद्ध के आश्रम पहुँचा और बोला- हे बुद्ध! क्या आप मुझे इस बात का उत्तर दे सकते हो कि ईश्वर है कि नहीं? बुद्ध मुस्कुराए और बोले- क्या तुम सचमुच ईश्वर के बारे में जानने आये हो या फिर अपनी विद्वता का प्रदर्शन करने आये हो? यदि तुम वास्तव में इस प्रश्न का उत्तर चाहते हो तो फिर कहो कि क्या तुम इसका उत्तर जानने के लिए कुछ दाँव पर भी लगा सकते हो?
उस व्यक्ति ने घमण्ड में आकर कहा कि मैं अपनी पूरी पूँजी दाँव पर लगाता हूँ। बुद्ध मुस्कुराए और बोले- मुझे ये सब नहीं केवल तुम्हारा मौन मात्र दाँव पर चाहिए है। दो वर्षों तक तुम्हें यहाँ मेरे आश्रम में मौन धारण करके रहना है, इसके बाद ही मैं तुम्हें इसका उत्तर दूँगा। वह क्षत्रिय एकदम से घबरा गया, लेकिन क्या करता उसने बुद्ध को हाँ तो कह दिया लेकिन चार महीने में ही घबरा गया और क्रोध से भर गया।
फिर एक दिन बुद्ध ने एक तालाब के किनारे उस क्षत्रिय को बुलाकर तालाब में चाँद देखने को कहा। क्षत्रिय ने तालाब में चाँद देखा। बुद्ध ने कहा अब एक पत्थर तालाब में फेंको और चाँद को देखो। क्या तुम्हें तालाब में अब चाँद दिखाई दे रहा है? क्षत्रिय ने कहा नहीं। बुद्ध ने उसे समझाया, कि चाँद की तरह ही ईश्वर है। शान्त तालाब रूपी मन और बुद्धि में ही दिखता है विचलित तालाब में नहीं। क्षत्रिय एक बार में ही सबकुछ समझ चुका था और बुद्ध के चरणों में जा गिरा।
Author: Amit Rajpoot
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