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भगवान बुद्ध ने अपने अंतिम समय में अपने शिष्यों से कहा कि यदि किसी के मन में कोई शंका हो तो पूछ लो। शिष्यों के बीच से किसी ने प्रश्न नहीं किया। बुद्ध ने अपनी बात को तीन बार कहा, लेकिन शिष्यों में से किसी ने भी बुद्ध से कोई प्रश्न नहीं किया। ऐसे में बुद्ध ने सभी से कहा कि अप्प दीपो भवः यानी कि मेरे जाने के बाद आप सभी अपना दीपक स्वयं बनना। स्वयं को खोजना, किसी की शरण में न जाकर अपनी ही शरण में जाना। आपको बता दें कि बुद्ध ने अपने समय में बहुत से लोगों को रास्ता दिखाया, जीवन की एक नई धारा के बारे में बताया। जो लोग जीवन को एक यंत्र की भाँति जी रहे थे, उन्हें चेताया और जगाया।
लेकिन समझने वाली बात है कि बुद्ध ने जब इस दुनिया को छोड़ा तो उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि तुम मेरे कहे का अनुसरण करते रहना या फिर मेरी ही बातों की गाँठ लगाकर बैठ जाना, बल्कि बुद्ध ने तो यह कहा कि अप्प दीपो भवः! ऐसे में यह समझने वाली बात है कि जहाँ बुद्ध ने इतनी ज्ञान की बातें बताने के बाद भी लोगों से कहा कि अप्प दीपो भवः!
जी हाँ, आपको बता दें कि जब उजाला नहीं होता है तो अंधेरा अपने आप अपने होने का प्रमाण देता है। ठीक इसी प्रकार जब अंधेरा नहीं होता है, इसका आशय है कि प्रकाश है। ऐसे में जब हमारे बीतर से हम अज्ञानता को दूर कर देते हैं, तो वही ज्ञान होना होता है. इसी को बुद्ध ने अप्प दीपो भवः कहा है, न कि अपने भीतर कुछ अलग से ज्ञान बढ़ाने की। इसलिए अज्ञान को खोजो और उसे हटा दो तो आप स्वयं ज्ञान की ओर अपने आप हो जाओगे।
बुद्ध ने अपने पूरे जीवन भर लोगों से कभी नहीं कहा कि मैं जो कह रहा हूँ उसे मान लो। उनका मक़सद यह रहता था कि लोग अपने अनुभव के आधार पर ही उनकी बातों को समझें। इसीलिए बुद्ध ने अपने अन्तिम समय में कहा था कि अप्प दीपो भवः!
Author: Amit Rajpoot
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