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क्या आपको पता है कि रेड मीट खाने वालों की आम लोगों की अपेक्षा में मृत्यु का दर अधिक होता है। इसके लिए एक अध्ययन किया गया जिसमें हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने अगले 8 वर्षों के दौरान मृत्यु दर के साथ आठ साल की अवधि में रेड मीट की खपत में बदलाव के बीच के लिंक को देखा। जिसमें ये पाया गया कि रेड मीट मृत्यु के उच्च जोखिम से जुड़ा हुआ है।
लाल मांस की जगह अंडे, मछली, साबुत अनाज और सब्जियां लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अमेरिका के 55 साल की आयु की 50 लाख से अधिक महिला नर्सों के डेटा का उपयोग किया जो शुरू में हृदय रोग और कैंसर से मुक्त थे। हर चार साल में प्रतिभागियों को फूड फ़्रीक्वेंसी प्रश्नावली दी जाती थी, जहां उनसे पूछा जाता था कि बीते साल में उन्होंने औसतन कितने हिस्से का खाना खाया था।
इस अध्ययन की अवधि के दौरान किसी भी कारण से होने वाली मौतों की करीब 14 हजार थी। जिनकी मौत का प्रमुख कारण हृदय रोग, कैंसर, श्वसन रोग और न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग थे। उम्र और अन्य संभावित प्रभावशाली कारकों के लिए समायोजित करने के बाद एक सप्ताह या उससे अधिक आठ साल की अवधि में रेड मीट का सेवन अगले आठ वर्षों में मृत्यु के 10 प्रतिशत अधिक जोखिम से जुड़ा था।
कुल मिलाकर अधिक साबुत अनाज, सब्जियां या अन्य प्रोटीन खाद्य पदार्थ जैसे कि बिना मुर्गे की खाल, अंडे और मछली खाने के दौरान लाल मांस का सेवन कम करना, पुरुषों और महिलाओं में मृत्यु के कम जोखिम से जुड़ा था। इसलिए अब रेड मीट को खाना कम करें ताकि आप स्वस्थ रह सकें।
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