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भिखारियों की दशा देखकर हर किसी को उन पर तरस आ जाता है और लोगों के जो भी थोड़े-बहुत छुट्टे पैसे होते हैं वह उन्हें दे देते हैं। या कभी-कभी कोई खाने-पीने की चीज देकर भी बेसहारा लोगों का पेट भर देते हैं। लेकिन अब जमाना बदल चुका है और बदलते दौर के साथ भिखारी भी डिजिटल होते जा रहे हैं। दरअसल, हाल ही में आई खबरों के मुताबिक ऐसा कहा जा रहा है कि अब भिखारी भीख मांगने के लिए भी QR कोड और ई-वॉलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
लेकिन इससे भी हैरान करने वाली बात यह है कि इसके जरिए वह 45 हजार रुपए तक की कमाई भी कर रहे हैं। बता दें कि, कई ई-वॉलेट कंपनियों ने भिखारियों को क्यूआर कोड उपलब्ध करवाया है। हालांकि, आप यह जान चौंक जाएंगे कि इस QR कोड के की वजह से लोगों का डेटा भी लीक हो रहा है। लोग जैसे ही इन्हें भीख देने के लिए इस क्यूआर कोड को स्कैन करते हैं तभी उनका डेटा कंपनियों के पास पहुंच जाता है और वे इस डेटा को मार्केट में बेचकर एक मोटी रकम हासिल कर लेती हैं।
चीन के कई पर्यटन स्थलों और सब-वे स्टेशन्स के पास बहुत से भिखारियों को बैठे देखा जा सकता है। उनके पास आपको ये QR कोड भी रखे दिख जाएंगे। उनके पास यह डिजिटल सिस्टम होने की एक बड़ी वजह यह भी है कि उन्हें इसके जरिए आसानी से भीख मिल जाती है और लोग छुट्टे पैसे न होने का बहाना भी नहीं बना सकते, क्योंकि ऐसे में भिखारी उन्हें इस कोड को स्कैन करने की सलाह दे देते हैं।
चीनी बाजार में कई तरह के स्पांसर्ड कोड भी आ चुके हैं। अगर किसी ने भिखारी को कुछ नहीं भी दिया है, लेकिन केवल इस स्पांसर्ड कोड को ही स्कैन कर दिया तो भी उसे थोड़े बहुत पैसे मिल ही जाएंगे।
गौरतलब है कि, QR कोड से मिली रकम सीधे उनके डिजिटल वॉलेट में चली जाती है। इसके लिए न तो उन्हें बैंक में अपना कोई अकाउंट खुलवाने की जरूरत है और न ही मोबाइल फोन रखने की। बल्कि वह सिर्फ अपनी QR शीट दिखाकर ही दुकानों से अपनी जरूरत का सामान खरीद सकते हैं।
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