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प्रवासी पक्षी जो आमतौर पर मानसून से पहले चिलका झील और ओडिशा के दूसरे हिस्सों में पहुंचते हैं, लेकिन इस साल इस झील में पक्षियों को अभी तक देखा नहीं जा सका है। राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून पहले से ही आ चुका है। प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी उदय नारायण देव ने कहा कि चितकबरी कोयल जिसे जैकबिन कुक्कू भी कहा जाता है।
उसने अभी तक राज्य में अपने पंख नहीं फैलाये हैं। इस पक्षी को स्थानीय रूप से 'पिका' कहा जाता है। पक्षीविद ने कहा कि मैंने राज्य में पिछले कुछ वर्षों से चितकबरी कोयल की दृष्टि से मानसून के आगमन पर नज़र रखी है और यह भी पुष्टि की है कि मानसून की शुरुआत से पहले पक्षी के आगमन की संभावना थी।
देव ने कहा कि इस साल विशेष पक्षी गायब है, हालांकि मानसून पहले ही राज्य में आ चुका है। काले और सफेद पक्षी दक्षिण-पश्चिम मानसून से पहले मई और जून के दौरान यहां पहुंचने के लिए अफ्रीका से हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं और आमतौर पर जनवरी के बाद अपने घर लौटते हैं।
हम मानसून पक्षी के राज्य में लापता होने का सटीक कारण नहीं कह सकते हैं। इसपर गहन अध्ययन की आवश्यकता है। प्रवासी पक्षी जैसे चितकबरे पक्षी कोयल राज्य में आम तौर पर राजा त्योहार से पहले पहुंचते हैं। इस पक्षी की दृष्टि को भी मानसून का अग्रदूत माना जाता है। राज्य के ग्रामीण इलाकों में किसान कृषि कार्य की तैयारी तब शुरू करते हैं, जब वे चितकबरे कोयल की आवाज सुनते हैं।
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