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भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान धनराज पिल्ले का जन्म 16 जुलाई, 1968 को महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में खड़की क़स्बे में हुआ था और आज धनराज पिल्लई अपना 51वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। आपको बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में धनराज पिल्लई की शुरुआत साल 1989 में नई दिल्ली में आयोजित एल्विन एशिया कप में देश के प्रतिनिधित्व के साथ हुई थी, लेकिन अब हॉकी की राष्ट्रीय टीम से यूँ तो धनराज पिल्लई ने अपनी सेवाएँ देना छोड़ चुके हैं, लेकिन इस समय वे भारतीय हॉकी टीम के प्रबंधक के रूप में ज़िम्मेदारियाँ भी निभा रहे हैं। इसके साथ ही, वे कंवर पाल सिंह गिल के निलंबन के पश्चात निर्मित भारतीय हॉकी फेडरेशन की अनौपचारिक यानी कि एडहॉक समिति के सदस्य भी हैं।
आपको बता दें कि धनराज पिल्लई बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जो कि मूलरूप से तमिलनाडु का रहने वाला है। इनके पिता रोज़ी-रोटी की तलाश में पुणे आ गये और यहीं बस गये। ये अपने माँ-बार की चौथी संतान हैं, जिनका नाम इनके पिता ने इस उम्मीद के साथ रखा था कि ये उनकी गुरबत को पूरी तरह से दूर कर देंगे और धन की कमी से उन्हें छुटकारा मिल जायेगा। आगे चलकर हुआ ही यही, धनराज पिल्लई अपने परिवार के लिए क़िस्मत बनकर उभरें।
ग़ौरतलब है कि काफ़ी संघर्षों के साथ ख़ुद को स्थापित करने वाले धनराज पिल्लई को 1999-2000 में भारत के सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 2000 में उन्हें नागरिक सम्मान पद्मश्री भी प्रदान किया गया। छोटी कद-काठी और लहराते बालों वाले धनराज अपने युग के सबसे प्रतिभाशाली फॉरवर्ड खिलाड़ी रहे हैं, जो विरोधियों के गढ़ में कहर बरपाने की क्षमता रखते थे।
Author: Amit Rajpoot
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