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खाड़कू संदीप कौर तब महज 16-17 साल की ही रही होंगी, जब इन्होंने पहली-पहली बार आतंकवादी बनने की सोची थी। जी हाँ, तब ये सिर्फ़ 10वीं कक्षा में पढञती थीं। ग़ौर करने लायक है कि खाड़कू संदीप कौर ने 10वीं कक्षा में जो हरकत कर डाली थी, उसे जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएँगे। इस उम्र में इन्होंने अपनी माँ को सीधे जाकर बताया कि ये बब्बर खालसा के आतंकवादी संगठन खाड़कू में शामिल होकर एक खाड़कू बनना चाहती हैं। संपीद की बात कौर की बात सुनकर इनकी माँ ने उसे बचकानी हरकत समझते हुए उसी लहजे में समझाया कि खाड़कू बनने वालों को पुलिस पकड़कर मारती है और उसको जख़्म देकर उनमें नमक और मिर्च भर देती है।
माँ की ये बात सुनते ही डरने की बजाय संदीप कौर किचन में गयी और चाकू उठाकर अपनी दोनों कलाइयों में लंबे और गहरे जख़्म कर लिये। इन जख़्मों में नमक और मिर्च भरकर संदीप अपनी माँ से बोली कि देखो, मुझे इन घावों में न कोई दर्द हो रहा है और न ही जलन। वास्तव में इस घटना के बाद ही संदीप की माँ ने ये अंदाज़ा लगा लिया था कि ये एक दिन बड़ी होकर खाड़कू बनेगी और हुआ भी यही कुछ ही दिन में संदीप कौर खाड़कू के अड्डे पर पहुँती और बन गयी खाड़कू संदीप कौर।
खाड़कू संदीप कौर 21 जुलाई, 1992 के दिन अमृतसर से गिरफ़्तार कर ली गयी और उन्हें जेल भेज दिया गया। चार साल तक बंदी रहने के बाद संदीप बाहर आयीं, लेकिन तब तक इनकी सोच और ज़मीन बदल चुकी थी। दिलचस्प है कि संदीप कौर ने जेल के भीतर ही अपनी 12वीं की पढ़ाई भी की थी। तबी जेल में ही रहते वक़्त उन्होंने ये सोच बना ली थी कि अब वह चरमपंथियों के बच्चों को उनके अतीत में डूबने नहीं देंगी। लिहाजा एक चैरिटेबल ट्रस्ट बनाकार संदीप अब उग्रवादियों और चरमपंथियों के बच्चों को पढ़ाने का काम करती हैं। दिलचस्प है कि इनके ट्रस्ट में 250 बच्चियाँ भी आ गयी हैं।
Author: Amit Rajpoot
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