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वैसे तो किसी को जेल के सामने से जाने में कुछ अनोखा नहीं दिखता, लेकिन जब आप बिहार के भागलपुर में स्थित विशेष केंद्रीय जेल के पास से गुजरेंगे तो हो सकता है कि खूब गाने बजाने की आवाजें सुनाई दें। ऐसे में शायद आप चौंक जाएंगे। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां के कैदियों को म्यूजिक सिखाया जा रहा है और एक एक ऑर्केस्ट्रा टीम तैयार हो रही है। जेल प्रशासन ने ऐसी अनोखी शुरुआत एक खास लक्ष्य को ध्यान में रखकर की है। दरअसल, संगीत के जरिए वह यहां के कैदियों की सोच में बदलाव लाना चाहते हैं।
इस पर जेल प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि, उन्होंने कुछ कैदियों को म्यूजिक के साथ जोड़कर 22 कैदियों वाली एक टीम भी तैयार कर ली है। उन्हें भागलपुर और कोलकाता के कलाकारों द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस कैदी बैंड के साथ एक ऑर्केस्ट्रा टीम भी तैयार की जा रही है। इस टीम में मौजूद 8-10 कैदी सिंगर और डांसर हैं। बता दें कि, जेल प्रशासन कैदियों को म्यूजिक से इसलिए भी जोड़ रहे हैं ताकि उन्हें मानसिक तनाव निजात दिलाई जा सके।
ऐसा होने पर उनकी जिंदगी में तो बदलाव आएगा ही, साथ ही उनमें मौजूद आपराधिक प्रवृत्ति भी खत्म हो जाएगी। इस बारे में चर्चा करते हुए जेलर सुधीर शर्मा का कहना है कि, हर हफ्ते जेल में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती जैसे कुछ खास मौकों पर बैंड बजेगा। उन्होंने आगे कहा कि, 15 अगस्त को इस बैंड का शुभारंभ किया जाएगा।
जेल प्रशासन इस बारे में आगे की जानकारी देते हुए यह भी कहा कि, फिलहाल कैदियों को हर दिन 4-5 घंटे संगीत का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद आने वाले समय में जब ये लोग म्यूजिक सीख लेंगे तो वह दूसरे कैदियों को भी इसका प्रशिक्षण देंगे। सिर्फ इतना ही नहीं, जेल प्रशासन ने सरकारी खर्चे पर बैंड और ऑर्केस्ट्रा के लिए आवश्यक वाद्ययंत्र और कुछ साज-सज्जा का सामान भी खरीदा है। इसके अलावा 25 लाख रुपए की लागत में जेल के भीतर एक स्टेज भी तैयार करवाया गया है, जहां कैदी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
जो अन्य दर्शक कैदी होंगे उनके बैठने के लिए एक गैलरी की बनवाई गई है। जेल प्रशासन के मुताबिक, उनके इस कदम से कैदियों को संगीत तो सीखने के लिए मिलेगा ही, बल्कि जेल का माहौल भी बेहतर हो जाएगा। संगीत से उन्हें आत्मिक शांति मिलेगी।
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