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सावन या श्रावण हिन्दी पञ्चाङ्ग के हिसाब में पड़ने वाला पाँचवा बेहद महत्वपूर्ण महीना होता है। यह वर्षा ऋतु का सबसे प्रमुख महीना होता है, जो प्रकृति को नवीनता प्रदान करता है। सम्पूर्ण जैव मण्डल के लिए कई लिहाज से श्रावण मास बेहद प्रमुख स्थान रहता है। यही श्रावण का महीना हमारे धान्य के बीज रोपने का महीना होता है, जो समस्त जीवन का मूलाधार है। ये सावन का महीना आध्यात्मिक चेतना को जगाने का सबसे उपयुक्त महीना माना जाता है, क्योंकि इस महीने में प्रकृति अपने सबसे जीवंत और संवेदनशील अवस्था में होती है।
जी हाँ, जहाँ एक तरफ़ प्रकृति अपना श्रृंगार करके सावन के महीने में सज-धजकर तैयार रहती है और जीवन के मूलाधार यानी कि धान्य की रोपाई होती है और हर तरफ़ उल्लास व सर्जना की अर्चना होती है, तो वहीं इसके बरक्स विनाश के महादेव भगवान शंकर की पूजा और अर्चना के लिए भी ये महीना महत्वपूर्ण माना जाता है। इस प्रकार हमें एक तरफ़ सर्जना तो वहीं दूसरी तरफ़ निवाश का एक साथ होश रखना पड़ता है, जिससे की हम इस संसार की वास्तविकता का बोध अपने चित में कर सकते हैं। इसीलिए सावन के महीने को आद्यात्मिक चेतना को जगाने वाला महीना माना जाता है।
ऐसे में हम सावन के महीने की महत्ता का अंदाज़ा लगा सकते हैं। आपको बता दें कि आज बुधवार से सावन के पवित्र महीने का आग़ाज़ यानी की शुभारम्भ हो चुका है। चूँकि शिव की स्तुति और अभिषेक के लिए सावन का महीना सबसे पवित्र होता है, इसलिए भगवान शिव के सबसे पवित्र दिन सोमवार इस महीने में ख़ास महत्व रखते हैं। अतः सावन के सोमवार को शिव के जलाभिषेक का सबसे बड़ा महत्व बताया गया है।
इस सावन की महत्वपूर्ण तिथियाँ
17 जुलाई, सावन माह का पहला दिन
22 जुलाई, सावन की पहली सोमवारी
29 जुलाई, सावन की दूसरी सोमवारी
05 अगस्त, सावन की तीसरी सोमवारी
12 अगस्त, सावन की चौथी सोमवारी
15 अगस्त, सावन माह का अंतिम दिन
Author: Amit Rajpoot
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