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राजेश खन्ना अपने बेहतरीन और सुपर वर्क की बदौलत हिन्दी सिनेमा में बतौर एक्टर और प्रोड्यूसर ऊँचा मकाम रखते थे, इसी की बदौलत इन्हें बॉलीवुड के पहले सुपर स्टार होने का तमगा हासिल है। इसके अलावा उन्हें एक कर्मठ राजनीज्ञक के रूप में भी अच्छी-ख़ासी पहचान मिली, जो कि आज हमारे बीच नहीं हैं। जी हाँ, आपको बता दें कि 18 जुलाई, 2012 को बॉलीवुड के इस पहले सुपर स्टार ने हमेशा-हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ दिया था और राजेश खन्ना की आज 7वीं पुण्यतिथि मनायी जा रही है।
आपको बता दें कि अपने जीवन के अंतिम दौर के करियर में राजेश खन्ना ने साल 2000 से लेकर 2009 तक चार टेलीविज़न सीरियल में काम किया था। इससे पहेल उन्होंने साल 2010 में फ़िल्म रियासत, साल 2009 में काश मेरे होते और साल 2008 में वफ़ा जैसी फ़िल्मों में भी अभिनय किया था।
ये वास्तव में साल 1991 में राजेश खन्ना के सांसद बनने के बाद उनकी फ़िल्मों में दोबारा से वापसी का सिलसिला था, जो कि साल 1994 में फ़िल्म ख़ुदाई से ही शुरू हो चुका था, हालांकि इन्होंने फिर 10 फ़िल्मों के अलावा अन्य फ़िल्में नहीं की थी। ऐसे माना जाता है कि राजेश खन्ना से बाक़ी मिले फ़िल्मों के ऑफ़र्स को मना कर दिया था।
बहरहाल, ये जानना भी काफ़ी दिलचस्प होगा कि साल 1965 में यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स एंड फ़िल्मफ़ेयर की ओर से आयोजित ऑल इंडिया टैलेंट कॉन्टेस्ट के लिए प्रतिभागी बने कुल 10,000 से भी अधिक प्रतियोगियों में से कुल 8 फाइनलिस्ट्स में से एक फ़ाइनलिस्ट थे, जिसमें एफ़टीआईआई के स्टुडेंट्स सुभाष घई और धीरज कुमार जैसे लोग भी शामिल थे। ऐस में राजेश खन्ना के बारे में ये राय बनायी जा सकती है, कि प्रतिभा के मामले में इनका कोई सानी न तो था और न ही आगे होगा।
Author: Amit Rajpoot
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