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अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने सालों से पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में ऐतिहासिक फैसला करते हुये उनकी फाँसी पर रोक लगाते हुए दुनिया में न्याय की नज़ीर पेश की है। दिलचस्प है कि कुलभूषण जाधव के लिए भारत के वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस यानी कि आईसीजे में जाधव पर मात्र एक रुपये फीस लेकर भारत का पक्ष रखा। साल्वे की बहस और दलील के बाद अंतर्राष्ट्रीय अदालत ने कुलभूषण जाधव के लिए पाकिस्तान के द्वार फ़ैलाये गये झूठ को पूरी तरह से नकारते हुये कहा कि इस्लामाबाद ने कुलभूषण जाधव के साथ वियना सन्धि से उलट जाकर व्यवहार किया। ऐसे में हमें वियना सन्धि के बारे में समझने की ज़रूरत है।
इससे पहले आपको ये भी जानना चाहिए कि वियना संधि के मुताबिक राजनयिकों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है और न ही उन्हें किसी तरह की हिरासत में रखा जा सकता है। आजाद और संप्रभु देशों के बीच आपसी राजनयिक संबंधों को लेकर सबसे पहले साल 1961 में वियना कन्वेंशन हुआ। इस संधि के तहत कुल 54 आर्टिकल हैं। फरवरी 2017 में इस संधि पर दस्तखत कर 191 देशों ने इसेके पालन के लिए अपनी सहमति जताई थी, जिसमें पाकिस्तान और भारत दोनों ही देश शामिल हैं।
आपको बता दें कि साल 1963 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसी संधि से मिलती जुलती एक और संधि ‘वियना कन्वेंशन ऑन कांसुलर रिलेशंस’ का प्रावधान किया। इस संधि पर अब तक 179 देशों ने हस्ताक्षर कर अपनी सहमत दी है। इस संधि के तहत कुल 79 आर्टिकल हैं। भारत ने जाधव का मामला इसी संधि के तहत उठाया है।
Author: Amit Rajpoot
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