Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
सावन के महीने में शिव के विशेष भक्त भैरव के पूजन से नहीं चूकते हैं, क्योंकि शिव के एक अवतार भगवान भैरव भी हैं। वास्तव में जिन्हें भी भगवान शिव के इस भैरव रूप की पूजा और पर्व की निजता के बारे पता है, वे ख़ासतौर पर सावन के महीने में भैरव मन्दिर में विग्रह के श्रृंगार भोग के साथ विधिवत पूजा और आरती से कभी नहीं चूकते हैं। आपको बता दें कि यूँ तो पूरे साल आप भले ही भगवान भैरव के मन्दिर में जायें अथवा न जायें, लेकिन बुद्धिमानी दिखाने वाले लोग साल में एक बार इस सावन में किसी न किसी सोमवार को भगवान भैरव की पूजा ज़रूर करते हैं।
आपको बता दें कि हमारी सनातन परंपरा में भगवान भैरव को शिव का रूद्र अवतार कहा जाता है। जी हाँ, भगवान भैरव को सिव का अंश अवतार माना जाता है, जिनके बारे में रूद्राष्टाध्यायी में साफ़तौर पर वर्णित है कि भगवान भैरव का रंग श्याम है। उनकी चार भुजाएँ हैं, जिनमें वे त्रिशूल, खड्ग, खप्पर और नरमुंड लिये हुये हैं।श्याम यानी कि काले रंग का श्वान यानी कि कुत्ता इनका वाहन है।
सावन के महीने में भगवान काल भैरव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ये श्मशानवासी हैं, जहाँ ये भूत, प्रेत और योगनियों के स्वामी हैं। ऐसे में ये अपने भक्तों की इन सबसे रक्षा भी करते हैं। वैसे भी भैरव का अर्थ होता है भय से रक्षा करने वाला। इस कारण भैरव को भयानक ध्वनि करने और हुंकार करने वाला देवता कहते हैं। सावन के महीने में इनकी आराधना विशेष फलदायी होती है।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App, वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.