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हर एक देश के लिए उसका ध्वज काफी एहमियत रखता है। भारत देश के झंडे की बात करें तो ये तीन रंग में आपको देखने को मिलेगा। इन तीन रंगों को एक साथ लाने के लिए कई तरह लड़ाई लड़ने पड़ी थी। राष्ट्रीय ध्वज जिस तरह से आज दिखता है वैसा पहले नहीं दिखता था। आज के ही दिन साल 1947 में ध्वज राष्ट्रीय होने की पहचान मिली थी। बता दें कि इसके पीछ गांधी जी का बहुत बड़ा हाथ था। इसके अलाव इसके तीनों रंगो के पीछे एक खास वजह छुपी है। साथ ही अशोक चक्र का भी अपना एक मत्व है।
आज जानिये इसके पीछे की कहानी...
इससे पहले देश के पास एक नीले रंग का ध्वज था। जिसे ये पता चलता था कि देश आजाद नहीं हुआ है। इसी के साथ धेस पर अभी भी ब्रितानी हुकुमत काबिज है। इसका रंग उस वक्त नीला था और इस पर एक मुकुट बना हुआ था। इसके बाद देश अंग्रेज़ों से आजाद करवाया गया तो इसके बाद एक खास तरह की बहस चालू गयी कि देश का ध्वज किस तरह का हो।
1906-
7 अगस्त को इस साल देश में अनाधिरारिक ध्वज फैहराया गया। इसके तीन रंग थे, इसको पश्चिम बंगाल (जो उस वक्त Calcutta था) के पारसी बागान में फेहराया गया। इस पर तीन रंग की रेखाएं थी। इसमें लाल, हरा और पीला। इस पर 8 कमल बने थे। जिससे इसके 8 province के बारे में पता चलता था। इसकी पीली रेखा पर ‘वंदे मातरम्’ लिखा था। इस पर नीचे की तरफ एक चांद और दूसरी ओर सूरज बना है।
1907-
इस साल देश से बाहर पहली बार किसी व्यक्ति ने झंडा फेहराया था। बता दें कि इस साल पेरिस में मेडम कामा ने इसको फेरहया था। इस साल पहली बार ध्वज में भगवा रंग देखने को मिला था। इस में उपर की तरफ 7 कमल बने थे।
इसके बाद कई साल तक ध्वज के नये डिजाइन आये और इस पर काफी चर्चा भी हुई। मगर एक भी डिजाइन इस तरह का नहीं था कि किसी को पसंद आए। साथ ही कोई भी डिजाइन लोगप्रिये नहीं हुआ। साल 1921 गांधी जी ने एक तिरंगे का मशविरा दिया जिस पर एक चरखा बना हुआ था। इसमें जो भी रंग होने थे उनसे देश में साप्रदायिक एकता का पता चलता। साथ ही दो रंग देश में दो बड़ धर्मों का संकेत बनते।
इसके बाद इसमें लाल हरा और सफेद रंग भर दिया गया। जिसमें लाल रंग बलिदान का हरा रंग उम्मीद का और सफेद रंग शांती का प्रतीक बवा था। फिलहाल में इस्ताल होने वाले झंडे की आकृती को साल 1923 में भी एक बार इस्तेमाल किया गया था। बता दें कि 23 अप्रेल को 1923 नागपुर में इसको जलियांवाला बाग हत्याकांड की सालगिरा मनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद इसका नाम स्वराज ध्वज रखा गया था और इसको देखने के बाद लोगों के दिलों में देश क आजाद देखने की आशा जाग चुकी थी।
साल 1931 में इसको देश का प्रतीक बनाने की मांग तेज हो गयी थी। इसके बाद इसको साल 1947 में आपनाया गया था
डिजाइन
ये दिखने में आयताकार यानी की रेक्टैंगुलर होता है। इसमें तीन रंग की पट्टियां होती हैं। सबसे उपर इसमें भगवा रंग होता है, इसके बाद बीच में सफेद और आखिर में इसमें हरा रंग होता है। बीच में सफेद रंग की पट्टी में इसमें अशोक चक्र होता है। जिसका रंग नीला होता है। इन चारों रंगों की वैल्यू India saffron #FF9933, white #FFFFFF, India green #138808, and navy blue #000080 होती है।
इसका आकार और साइज कुछ इस तरह से है 2:3 ratio, इसकी लंबई इसकी चौड़ाई से 1.5 होनी जरूरी है। इसको बनाने के लिए खादी या फिर साटान के कपड़े का इस्तेमाल होता है। देश के सभी खादी ग्राम उद्योग में इसको बनाने का अनुमती है।
इसको देश की आजादी की आधिकारिक घोष्णा से 24 दिन पहले अपना लिया गया था।
Anida Saifi
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