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जो लड़कियां सावन के चार सोमवार व्रत रखकर भगवान शिव की अराधना करती हैं, उन्हें मनचाहा और अच्छा पति मिलता है। ये परंपरा सदियों से चली आ रही है, वर्तमान में भी लड़कियां अच्छे वर के लिए सावन के सोमवार पर उपवास रखती हैं। माना तो ये भी जाता है कि हर लड़की भगवान शिव की तरह एक आदर्श पति की चाहत रखती हैं। लेकिन यहां सवाल ये उठता है कि भगवान शिव तो एक वैरागी, श्मशानवासी योगी थे... तो लड़कियां उनके जैसे पति की चाहत क्यों रखती हैं?
आपको बता दें, इंद्र को छोड़कर भगवान शिव ही एकमात्र ऐसे भगवान हैं, जिनका पूरा परिवार है। उनकी पत्नी पार्वती, पुत्र गणेश और कार्तिकेय और पुत्री अशोक सुंदरी हैं। शिव के अलावा किसी भी भगवान का पूरा परिवार नहीं है। शिव की यही खूबी उन्हें दूसरों से अलग बनाती है। हर लड़की अपने शादीशुदा जीवन में भरापूरा परिवार की कामना करती है। भगवान शिव की अराधना इस वजह से भी की जाती है।
पार्वती की स्वतंत्रता भगवान शिव के लिए थी अहम-
भगवान शिव एकमात्र ऐसे भगवान थे, जो अपनी पत्नी को पूर्ण स्वतंत्र रखते थे। पार्वती ने विभिन्न अवतारों में राक्षसों का संहार किया है, वह शक्ति धारण कर स्वतंत्र रूप से कार्य करती थीं। यही नहीं... भगवान शिव हमेशा पार्वती को अपनी बराबरी का दर्जा देते थे। वहीं, दूसरे देवता अपनी पत्नियों को केवल अपनी सहायक के रूप में ही रखा करते थे। आज के समय में हर एक पत्नी पार्वती जैसी स्वतंत्रता की कामना करती है।
पार्वती को देते हैं अपना खूब समय-
शिव अपनी पत्नी पार्वती को कभी बोर नहीं होने देते थे, वह हमेशा पार्वती की बोरियत दूर करने के लिए उन्हें कोई न कोई कथा सुना रहे होते हैं। सनातन धर्म के ज्यादातर पुरामों और कथाओं की शुरुआत में आप देखेंगे कि शिव पार्वती को कथा सुना रहे हैं।
भगवान शिव से भोला कोई नहीं, भगवान शिव से रौद्र कोई नहीं-
शिव अन्य देवों से भी भिन्न हैं। शिव अपने रौद्र रूप तथा सौम्यता के लिए विख्यात हैं। वह ही सृष्टि के विधाता है और वह ही सृष्टि संहार के अधिपति भी है। सृष्टि की लय और प्रलय दोनों ही भगवान शिव के हाथों में है। हर एक पत्नी ये कामना करती है कि उसका पति रौद्र और सौम्य दोनों की प्रवृति से लीन हो।
पार्वती को कैसे मिले भगवान शिव?
माना जाता है कि सावन महीना भगवान शिव का अति प्रिय हैं। इसके पीछे की मान्यता यह हैं कि दक्ष पुत्री माता सति ने अपने जीवन को त्याग कर कई सालों तक श्रापित जीवन जीया था। उसके बाद उन्होंने हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पूरे सावन महीने में कठोर तपस्या की। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की। इस वजह से भगवान शिव को ये महीना अति प्रिय है। कहा जाता है कि इस महीने उनकी पूजा करने से उनके जैसे ही पति मिलने की इच्छा पूरी होती है।
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