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भारत में भी बहुत सी ऐसी जगहें हैं जिसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यहां की खूबसूरती और एडवेंचर्स आपको एक अनोखा अनुभव करवाएंगे। हालांकि, किसी भी दूसरे देश में जाने के लिए आपको वीजा की जरूरत पड़ती है। लेकिन आपको बता दें कि भारत का एक राज्य ऐसा है जहां घूमने के लिए खुद भारतीयों को भी खासतौर पर परमिट लेना पड़ता है, इसके बिना किसी को भी राज्य में जाने की अनुमति नहीं है। दरअसल, यहां हम नागालैंड के बारे में बात कर रहे हैं।
इस राज्य में Inner Line Permit का प्रावधान है। नागालैंड में Mokukchung, Mon, Wokha, Dimapur, Tuophema Village और Kohima जैसी कई ऐसी दिलचस्प और खूबसूरत जगहें हैं जिन्हें देखकर आप ऐसा महसूस करेंगे कि नॉर्वे और आइसलैंड जैसे देशों में अपनी छुट्टियां बिता रहे हैं। यहां तक कि Dzukou Valley आपको नॉर्वे और कनाडा के पहाड़ों की याद दिला देगी।
इसके अलावा नागालैंड में Shilloi Lake बिल्कुल इंसान के पैर के आकार की बना हैं, जो पहाड़ों से घिरी हुई है। नागालैंड टूरिज्म प्लेस के तौर पर दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां कि वाइल्ड लाइफ अपने वेकेशन्स को और यादगार बना देगी। लेकिन इस अनुभव को लेने के लिए आपको नागालैंड का इनर लाइन परमिट जरूर लेना होगा। इसे न केवल विदेशियों को बल्कि जो भारतीय भी यहां घूमने के लिए जाना चाहते हैं उनके लिए भी यह परमिट अनिवार्य है।
इस तरह ले सकते हैं 'इनर लाइन परमिट'
नई दिल्ली, कोलकाता, शिलॉन्ग और गुवाहाटी में नागालैंड हाउस बनाए गए हैं, जहां से आप आसानी से इस परमिट को इशू करवा सकते हैं। यहां के लोगों के लिए थोड़ी सहुलियत हो सकती है। लेकिन बाकी जगहों के लोगों को इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा, इसके बाद आपको परमिट मिल जाएगा। ऑनलाइन आवेदन के लिए http://home.nagaland.gov.in/inner-line-permit-ilp/ पर जाकर फॉर्म भरे। एक बार परमिट इशू होने के बाद आपको इसे नागालैंड बॉर्डर पर ही जमा करवाना होगा।
किन दस्तावेजों और किस कीमत में कितने दिन के लिए बनता है परमिट
इनर लाइन परमिट बनवाने के लिए आपको ज्यादा कोई डॉक्यूमेंट्स देने की जरूरत नहीं होती। इसके लिए आपको केवल अपना एक आईडी प्रूफ और 2 पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ देनी होती है। इसके अलावा अगर आप नागालैंड हाउस जाकर परमिट बनवाते हैं तो आपको 50 रुपए फीस देनी होगी, जबकि ऑनलाइन बनवाने पर 500 रुपए देने होंगे। यह परमिट 30 दिन के लिए इशू किया जाता है।
जानिए कब और क्यों लगाया यह प्रावधान
यह प्रावधान ब्रिटिश सरकार के समय से ही चलता आ रहा है। इसे केवल इसीलिए लगाया गया, क्योंकि नागालैंड में वन्य जीवन और प्राकृतिक औषधियों अत्यधिक मात्रा में है। ब्रिटिश सरकार इन्हें यहां से इंग्लैंड भेजती थी। यह नागा आदिवासियों की जगह थी और कोई शख्स यहां आसानी से नहीं आता था।
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