Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
तीन तलाक़ से संबंधित बिल मंगलवार को राज्य सभा में पास हो गया है। इसके साथ ही देशभर में जश्न का माहौल है। ख़ासतौर से महिलाएँ और उनमें भी मुस्लिम महिलाएँ इससे अधिक रोमांचित हैं। आपको बता दें कि भारत में ये तीन तलाक़ बिल बिना किसी क्रान्ति के एक बहुत ही गहरी सामाजिक कुरीति का ख़ात्मा है, जिसके सुधारक को आने वाली पीढ़ियाँ ढूँढ़ेंगी और तब उनकी अम्मी की अम्मियाँ बतालाएँगी कि ये संक्रमण काल का नहीं, लोकतांत्रिक भारत का उपहार है। हक़ीक़ तो यह है कि आज बहनों व माँओ से सच्चाई पूछिए तो यह उनके लिए आज़ादी का त्यौहार है।
आपको बता दें कि भारत के मुसलमानों की रूढ़िवादिता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि इनके हस्तक्षेप के कारण यहाँ वैश्वीकरण के लगभग तीन दशक बाद तीन तलाक़ जैसी कुप्रथा को समाप्त किया जा सका, उसमें भी एक धारा का कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, जबकि हमारे पड़ोसी मुस्लिम देशों जैसे अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश ने इसे दशकों पहले कमॉड में डालकर फ़्लश कर दिया था।
जी हाँ, ये बात ग़ौर करने लायक है कि तुर्की, साइप्रस, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया, मलयेशिया, जॉर्डन, मिस्र, ईरान, इराक, ब्रूनेई, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, लीबिया, सूडान, लेबनान, सऊदी अरब, मोरक्को, कुवैत, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका उन देशों में शामिल हैं, जहां तीन तलाक पर रोक है। ये सभी मुस्लिम देश हैं।
इस बारे में यही हम कुरान कमें दिये गये तर्कों की बात करें तो पवित्र कुरान में भी यह कहा गया है कि जहाँ तक संभव हो, तलाक़ न दिया जाए और यदि तलाक़ देना ज़रूरी और अनिवार्य हो जाए तो कम से कम यह प्रक्रिया न्यायिक हो। इस प्रकार तीन तलाक पर आये बिल के बाद लोग कुरान की इस बात का भी पालन करने लगेंगे।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App, वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.