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कैफे कॉफी डे (CCD) के मालिक वी.जी. सिद्धार्थ पिछले काफी वक्त तक लापता रहने के बाद हाल ही में उनका शव बरामद हुआ है। उनकी मौत से हर कोई हैरान है। एक अरब डॉलर से भी ज्यादा का अंपायर खड़े करने वाले सिद्धार्थ लाखों लोगों के लिए मिसाल थे। उन्होंने अपनी में कड़ी मेहनत करके फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है। लेकिन आज वह हमारे बीच मौजूद नहीं है। लेकिन आज हम उनकी जिंदगी से जुड़ी दिलचस्प बातों पर चर्चा करने जा रहे हैं। जिसमें आप उनके शौहरत और मेहनत दोनों के बारे में जान पाएंगे।
वी.जी. सिद्धार्थ का जन्म कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में हुआ था। वह एक ऐसे परिवार में पैदे हुआ थे, जहां पिछले 135 सालों से कॉफी उगाई जा रही थी। उनके कॉफी के खेत 500 एकड़ की जमीन में फैले हुए थे। हालांकि, इसके बावजूद वह नहीं चाहते थे कि उन्हें भी कॉफी इंडस्ट्री में ही जाना पडे़। उन्होंने कर्नाटक की मेंगलुरु यूनिवर्सिटी से अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन का डिग्री हासिल की। इसके बाद वह पिता से कुछ पैसे लेकर मुंबई की ओर चल पड़े।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1983-84 में मुंबई की एक कंपनी जेएम फाइनेंशियल लिमिटेड से की थी। जहां वह मैनेजमेंट ट्रेनी और इंटर्न के तौर पर काम किया करते थे। हालांकि, 2 साल मुंबई में रहने के बाद वह वापिस बेंगलुरु लौट गए और अपनी एक फाइनेंस कंपनी खोल ली। इसके अलावा वह अपने जिले चिकमंगलूर में उगाई जा रही कॉफी सालाना 28 हजार टन बाहर भेजा करते थे। इसके बाद उन्होंने 1992 में अमलगमेटेड बीम कंपनी (ABC) के नाम से एक कंपनी शुरू की, जिसका सालाना टर्नओवर 6 करोड़ रुपए था। लेकिन वक्त के साथ उनकी इस कंपनी को सफलता मिलती गई और कुछ ही सालों में इसका टर्नओवर 25 अरब रुपए हो गया।
सिद्धार्थ नें 1993 में अपने खेतों में उगने वाली कॉफी को एक्सपोर्ट करना शुरू किया था। इसी दौरान उनकी मुलाकात जर्मन कॉफी चेन के मालिक से भी हुई। सिद्धार्थ की कंपनी जर्मन कॉफी रिटेलर चिबो को भी कॉफी बीन्स सप्लाई करती थी। बता दें कि, चिबो ने 1948 में अपना एक कॉफी हाउस खोला था, जो वक्त के साथ मिलियन डॉलर फर्म बन चुका था। चिबो के इस सफर ने सिद्धार्थ को बहुत प्रभावित किया। इसके बाद उन्हें भी इस बात की इच्छा होने लगी कि वह भारत में अपनी कॉफी कैफे चेन बनाएंगे।
हालांकि, इसी पर विचार करते हुए सिद्धार्थ ने यह भी सोच लिया था कि वह देश में कॉफी पीने के लिए एक माहौल तैयार करेंगे। उन्हें यह अहसास भी हुआ कि एक कॉफी कप कॉफी बीन्स या पाउडर से कई गुना ज्यादा फायदा करवा सकता है। इसके बाद उन्होंने 11 जुलाई 1996 को बैंगलोर में अपना पहला 'कैफे कॉफी डे' खोल दिया। इसके उन्हें करीब डेढ़ करोड़ रुपए का खर्चा करना पड़ा। उस समय CCD की कॉफी केवल 25 रुपए की हुआ करती थी।
आज देशभर में 1500 से ज्यादा सीसीडी के आउटलेट मौजूद हैं। यहां तक बाहर देशों जैसे ऑस्ट्रिया, मलेशिया, नेपाल, चैक रिपब्लिक और इजिप्ट में भी सीसीडी आसानी से मिल जाएगा। इसके अलावा 4000 से भी ज्यादा लोगों को सीसीडी में रोजगार के अवसर मिले हैं।
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