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नागपंचमी के त्यौहार को अधिकारिक तौर पर नागपंचमी व्रत कहा जाता है। यह व्रत सावन के पवित्र महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है, जिसमें आठ विशेष नागों की पूजा और अर्चना के लिए यह त्यौहार मनाया जाता है। इस बात का प्रमाण हमें भविष्य पुराण में मिलता है, जहाँ पर कुछ इस प्रकार का उल्लेख मिलता है-
वासुकिः तक्षकश्चैव कालियो मणिभद्रकः।
ऐरावतो धृतराष्ट्रः कार्कोटकधनंजयौ ॥
एतेऽभयं प्रयच्छन्ति प्राणिनां प्राणजीविनाम् ॥
अर्थात् वासुकि, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय ये सभी प्राणियों को अभय प्रदान करते हैं। आपको बता दें कि नागों का जन्म कश्यप ऋषि की दो पत्नियों कद्रु और विनता से हुआ था। आइए नागपंचमी के शुभ अवसर पर इनमें से तीन सबसे शक्तिशाली नागों के बारे में जानते हैं।
शेषनागः
शेषनाग सभी नागों में सबसे शक्तिशाली नाग हैं। इन्हें अन्तनाग के नाम से भी जाना जाता है। शेषनाग अपनी इच्छा अनुसार पुरुष और नाग का रूप धारण करने की क्षमता रखते थे। शेषनाग को भगवान विष्णु का सेवक बताया गया है। पुराणों के अनुसार महाबारत काल में बलराम को शेषनाग का ही अवतार माना जाता है।
वासुकिः
वासुकि नाग वो हैं, जो भगवान शंकर के गले का हार हैं। इनका निवास स्थान कैलाश पर्वत है। पुराणों अनुसार वासुकि नाग अत्यंत ही विशाल और लंबे शरीर वाले माने जाते हैं। समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और राक्षसों ने मंदराचल पर्वत को मथनी तथा वासुकि को ही रस्सी बनाया था।
तक्षकः
तक्षक वही नाग हैं जिन्होंने महाभारत काल में राजा परीक्षित को डसा था। तक्षक पाताल में निवास करते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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