Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
मुल्ला नसरुद्दीन एक ऐसा नाम है, जो किसी तगड़े उदाहरण के वक़्त लोग अक्सर प्रयोग में लाते हैं। इस तरह मुल्ला नसरुद्दीन का नाम लगभग सभी ने सुना होगा। फिलहाल आपको बता दें कि लगभग 800 वर्ष पूर्व बगदाद के रेगिस्तान में घूमने वाले मुल्ला नसरुद्दीन परमज्ञानी थे। ज्ञान बांटने के उनके तरीके बड़े अनूठे थे। वे लेक्चर नहीं देते थे, बल्कि हास विनोद करके समझाने की कोशिश करते थे। उनका मानना था कि हँसी-मज़ाक में समझायी गयी बात हमेशा के लिए मनुष्य के जहन में उतर जाती है। सही पूछो तो मानव जाति के इतिहास में मुल्ला नसरुद्दीन इकलौते ऐसे‌ परमज्ञानी हैं जो कि हास्य के साथ ज्ञान का मिश्रण करने में सफल रहे हैं।
आपको बता दें कि मुल्ला नसरुद्दीन बगदाद की गलियों से प्रायः गधे पर और वो भी उल्टे बैठकर सवारी किया करते थे। कहने की जरूरत नहीं है कि उनका यह तरीका ही लोगों को हंसाने के लिए पर्याप्त था। मुल्ला नसरुद्दीन को तर्की लोग होजा कहते थे। तुर्की भाषा में होजा शब्द का अर्थ है शिक्षक या स्कॉलर। इस प्रकार सबसे प्रसिद्द विनोद चरित्र मुल्ला नसरुद्दीन होजा तुर्की थे।
ग़ौरतलब है कि मुल्ला नसरुद्दीन के चतुराई और वाकपटुता के किस्से संभवतः किसी वास्तविक इमाम पर आधारित होते हैं। कहा जाता है कि उसका जन्म वर्ष 1208 में तुर्की के होरतो नामक एक गाँव में हुआ था और साल 1239 में वह अक्सेहिर नामक मध्यकालीन नगर में बस गये, जहाँ हिजरी वर्ष 683 यानी 1285 ईस्वी में उसकी मृत्यु हो गई थी। मुल्ला नसरुद्दीन के इर्दगिर्द लगभग 350 कथाएँ और प्रसंग घूमते हैं, जिनमें से बहुतों की सत्यता सत्य है तो बहुतों की सत्यता संदिग्ध है।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lopscoop App, वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.