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बेज़बान जानवरों और चहचहाते पक्षियों को जब कोई इंजरी होती है, तो अक्सर वो उसके दर्द से कराहते अपना दम तोड़ देते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि उनको समय पर प्रोटेक्शन नहीं मिलता है और सही समय पर इलाज़ न मिलने के कारण वे हर हाल में मर ही जाते हैं। लेकिन राकेश अहलावत एक ऐसे शख़्त हैं जो ऐसे बेदम पड़े पशु-पक्षियों की न सिर्फ़ सुध लेते हैं बल्कि उनका वह इलाज़ कराकर उन्हें संरक्षित करने का काम करते हैं। आपको बता दें कि राकेश अहलावत हरियाणा के झज्जर ज़िले के डीघल गाँव के रहने वाले हैं।
ग़ौरतलब है कि स्नातक तक की पढ़ाई करने वाले राकेश अहलावत साल 2011 से पक्षियों के संरक्षण और घायल हो जाने पर उनके उपचार का काम कर रहे हैं। उन्हें पक्षियों की बहुत सारी क़िस्मों की अच्छी जानकारी है। इसलिए वे उनके वातावरण और पारिस्थितिकी का ख़्याल करके उन्हें संरक्षण करने का काम करते हैं। राकेश अहलावत बतते हैं कि ज़्यादातर पक्षी केवल और केवल हमारे द्वारा प्लास्टिक के उपयोग के कारण घायल और तकलीफ़ में चले जाते हैं। इसले हमें पॉलीथीन का कम से कम या उपयोग ही नहीं करना चाहिए।
हैरानी की बात तो यह है कि राकेश अहलावत जैसे पक्षियों को बचाने का काम करते हैं, ठीक वैसे ही यह पशुओं के बारे में भी सोचते हैं। एक बार की बात है कि राकेश अहलावत एक नीलगाय का शिकार करने आए हुये लोगों से जो कि नीलगाय को पकड़कर उनके सामने की उसका सिर धड़ से अलग कर एक बोरे में भर रहे थे, उनका विरोध करने लगे तो यह बदमाश क़िस्म के लोगों ने राकेश अहलावत को दौड़ा लिया और फिर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।
आपको बता दें कि ये कोई पहला मौक़ा नहीं था राकेश अहलावत के लिए, क्योंकि उन्हं पशु-पक्षियों के संरक्षण की दिशआ में ऐसा अक्सर करना ही पड़ता है। इस प्रकार, हथेली पर अपनी जान लेकर पशु-पक्षियों की जान बचाने वाले राकेश अहलावत हम सभी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं।
Author: Amit Rajpoot
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