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स्मरणीय संगीतकार भूपेन हजारिका को मरोपरांत भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को यह सम्मान दिया है। इस खास मौके पर आज हम आपको बहुमुखी प्रतिभा के धनी भूपेन हजारिका की निजी जिंदगी के बारे से रूबरू करवाने जा रहे हैं। साथ ही चलिए आज एक बार फिर से उनके कुछ ऐसे बेहतरीन नगमों को सुना जाए जिन्हें सुनकर एक बार फिर से पुराने दिनों की यादें ताजा हो जाती हैं।
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'दिल हूम हूम करे' और 'ओ गंगा तुम बहती हो क्यों' जैसे बेहतरीन गानों को अपनी जादूई आवाज से सजाने वाले भूपेन हजारिका गीतकार, संगीतकार और गायक होने के अलावा कवि, फिल्म निर्माता और लेखक भी थे। वे उन महान कलाकारों में से एक थे जो खुद ही अपने गाने लिखते, संगीतबद्ध करते और फिर गाते भी थे। उनकी मूल भाषा असमिया थी। लेकिन उन्होंने असमिया के अलावा बांग्ला और हिन्दी समित कई दूसरी भाषाओं में भी गाने गए।
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भूपेन हजारिका का जन्म असम के सदिया इलाके में हुआ था। उनके 9 भाई बहन थे और घर के 10 बच्चों में वह बड़े थे। हजारिका का संगीत से लगाव उनकी मां के कारण बढ़ा। जब उन्होंने अपने लिखे गाने को पहली बार गाया उस समय उनकी उम्र केवल 10 वर्ष थी। इसके अलावा उन्होंने 1931 में असमिया फिल्म इंडस्ट्री की दूसरी फिल्म 'इंद्रमालती' के लिए भी काम किया। तब वह 12 साल के थे।
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हजारिका ने राजनीति विज्ञान में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए. की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह पीएचडी की पढ़ाई करने के लिए न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी चले गए। उन्हें 1975 में सर्वोत्कृष्ट क्षेत्रिय फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।
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इसके अलावा हजारिका को 1992 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार, 2009 में असोम रत्न, संगीत नाटक अकादमी अवार्ड, 2011 में पद्म भूषण जैसे अवार्ड से भी सम्मानित किए गए। उनकी खासियत थी कि वह अपने गीतों में समाज के तमाम मुद्दों को उठाते और उन्हें शब्दों में पिरोकर कर दुनिया के सामने पेश करते थे। उनकी यही कला थी जिसके कारण वह दुनिया के महान गीतकारों की फेहरिस्त में आ गए थे।
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वर्ष 2011 में उन्होंने हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन उनकी वही जादूई आवाज और नग्में लोगों के कानों में आज भी गूंजते हैं। आज भी हजारिका के चाहने वालों की जुबां पर उनके बोल चढ़े होते हैं।
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