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रक्षाबंधन भाई और बहन के बीच रिश्तों की मज़बूती को बढ़ाने और उसे परिष्कृत करने वाला एक अलौकिक त्यौहार है। यह भारत में मनाये जाने वाले चार प्रमुख त्यौहारों में से एक है, जिसके बारे में कई सारी दंत कथाएँ. किंवदंतियाँ और लोक कथाएँ प्रचलित हैं। आपको बत दें कि रक्षाबंधन का त्यौहार सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह गुरुवार को मानाया जायेगा। इस त्यैहार के बारे में वैसे तो अलग-अलग युग की कई अलग-अलग कथाएँ प्रचलित हैं, जो अपने-अपने कालखण्ड और कल्पभेद में सबी सही हैं। इसमें भगवान गणेश और उनके दोनों पुत्रों शुभ और लाभ की कथा भी काफ़ी प्रचलित है। दिलचस्प है कि इसी कथा में माता सन्तोषी की उत्पत्ति या जन्म की कथा का भी प्रसंग है।
इस प्रसंग के अनुसार यदि कथा को कहें तो भगवान गणेश के दोनों पुत्र शुभ और लाभ इस बात को लेकर परेशान थे की उनकी कोई बहन नहीं है। इसलिए उन्होंने अपने पिता को एक बहन लाने के लिए जिद की। इस पर नारद जी के हस्तक्षेप करने पर बाध्य होकर भगवान गणेश को संतोषी माता को उत्पन्न करना पड़ा अपने शक्ति का उपयोग कर। वहीं ये मौका रक्षा बंधन ही था जब दोनों भाईयों को उनकी बहन प्राप्त हुई। ये बात भी ग़ौर करने लायक है कि भगवान गणेश की दो पत्नी रिद्धि-रिद्धि हैं। दो पुत्र शुभ लाभ हैं। अगर हम गणेश परिवार को ध्यान दें तो हम पाते हैं। इस बात को हम इस तरह समझ सकते हैं।
भगवान गणेश यानी बुद्धि, बल, विद्या के देवता हैं। यह तीनों अगर आपके पास हैं तो संभव है। आप पर रिद्धि-सिद्धि की कृपा बनी रहेगी। रिद्धि की कृपा हो तो हम कुशल बनते हैं। रिद्धि की कृपा हो तो हम सुरक्षित रहते हैं। गणेशजी के दो पुत्र शुभ और लाभ कुशलता को दर्शाते हैं। अगर यह सभी कुछ जीवन में मिल जाए तो हम संतोष पूर्वक ज़िंदगी यापन कर सकते हैं संतोष यानी संतोषी माता।
Author: Amit Rajpoot
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