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15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों से आजादी मिली थी। इस बात को करीब 200 साल लंबा वक्त बीत चुका है। हर साल इसी दिन हम उन नेताओं और शहीदों को याद करते हैं जिन्होंने देश को आजादी दिलवाने के लिए हंसते-हंसते अपनी जान की कुर्बानी दे दी। आजादी के 72वें साल के इस खास मौके पर हम आपको देश की उन ऐतिहासिक जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। आप भी स्वतंत्रता दिवस के इस खास मौके पर इन जगहों पर अपने परिवार के साथ पहुंचकर देशभक्ति के रंग में रंग सकते हैं।
लाल किला:- इस जगह एक खास महत्व है। यही वह जगह है जिसे बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतंत्रता के संघर्ष के दौरान अपने लिए एक मुख्य केंद्र के रूप में चुना था। भारत को जिस दिन आजादी मिली थी, उसी दिन देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लाल किले में ही अपना भाषण दिया था। इसे आज भी भारत की आजादी का प्रतीक माना जाता है।
राजघाट:- यह जगह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का स्मारक है। 1948 में राजघाट में गांधीजी का अंतिम संस्कार किया गया था। काले संगमरमर के पत्थरों से उनकी समाधि बनाई गई। यहां राजीव गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, पंडित जवाहरलाल नेहरू, के.आर. नारायण और इंदिरा गांधी का स्मारक है। इस जगह पर एक बेहद खूबसूरत बगीचा भी बनाया गया है।
कारगिल युद्ध स्मारक:- लद्दाख में स्थित यह जगह पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध लड़ रहे सैनिकों की देशभक्ति का प्रतीक है। इस युद्ध के दौरान शहीद हुए सभी सैनिकों के नाम यहां स्मारक के अंदर बलुआ पर लिखे हुए हैं।
जलियांवाला बाग:- अमृतसर में स्थित जलियांवाला बाग की कहानी शायद ही कोई ऐसा होगा जो नहीं जानता। इस हत्याकांड के एक शताब्दी के बाद हाल ही में माफी मांगी गई। वर्ष 1919 में बैसाखी के दिन जनरल डायर के आदेश पर अंग्रेग पुलिस ने फायरिंग कर दी, जिसमें 1000 से भी ज्यादा लोगों ने अपनी जाने गवां दी। आज भी इस जगह पर उनकी हत्या के वो दिल दहलाने वाले निशान मौजूद हैं।
वाघा बॉर्डर:- भारत और पाकिस्तान की सीमा पर वैसे तो हर दिन बहुत चहल-पहल लगी रहती है, लेकिन 15 अगस्त के मौके पर यहां हर किसी पर देशभक्ति का रंग देखने लायक होता है। 45 मिनट तक यहां पर झंडा फहराया जाता है। इसके बाद कई तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसे देखने के लिए भारी तादात में लोग पहुंचते हैं।
इंडिया गेट:- यह एक युद्ध स्मारक है, जो 1931 में बनवाया गया था। इसे उन भारतीय सैनिकों की याद में बनवाया गया, जो प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शहीर हो गए। 15 अगस्त के मौके पर यहां का माहौल देखने लायक होता है। प्रधानमंत्री सुबह 8 बजे झंडा रोहण करते हैं। इसके बाद सभी मिनिस्टर्स और देशवासी मिलकर राष्ट्रीय गान गाएंगे। 21 बार फायर के साथ देश के स्वंतत्रता सेनानियों को सलामी दी जाती है।
चंद्रशेखर आजाद पार्क:- वर्ष 1931 को चंद्रशेशर आजाद और ब्रिटिश सैनिकों के बीच खूब गोलीबारी हुई। लेकिन अकेले ही अंग्रेज पुलिस का सामना कर रहे चंद्रशेखर आजाद के पास जब सिर्फ एक ही गोली बची तो उन्होंने खुद को ही गोली से मार दी और वीरगति को प्राप्त हो गए। आजाद के शहीद होने के बाद वहां के लोग उस पेड़ की पूजा करने लगे जहां उन्होंने खुद को गोली मारी थी। इसकी मिट्टी को शीशियों में भरकर अपने साथ ले जाने लगे। इलाहाबाद में मौजूद इस पेड़ को आज चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है।
शौर्य स्मारक:- यह युद्ध स्मारक भोपाल में स्थित है। युद्ध में वीरगति को प्राप्त सभी भारतीय सैनिकों के नाम यहां पर शिलालेख हैं। इस जगह को युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों द्वारा किए गए बलिदान और स्वंतत्रता के संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। यहां आकर आपको भी अपने अंदर एक देशभक्ति की भावना का अहसास होगा।
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